उज्जैन की तीन बेटियों ने सूक्ष्म कला में रचा इतिहास, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
इलायची, मसूर और शंख पर उकेरी धार्मिक आकृतियां, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

उज्जैन, नप्र। महाकाल की नगरी उज्जैन की तीन युवा छात्राओं ने सूक्ष्म कला के क्षेत्र में ऐसा काम किया है, जिसने शहर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है। बेहद छोटी वस्तुओं पर धार्मिक आकृतियां उकेरना आसान नहीं होता, लेकिन इन कलाकारों ने धैर्य और अभ्यास से इसे संभव कर दिखाया।
तीनों छात्राएं उज्जैन के एक निजी फाइन आर्ट्स कॉलेज में अध्ययनरत हैं। उनका कहना है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक प्रतीकों को सूक्ष्म रूप में चित्रित करना उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा भाव है।
अपेक्षा गोखरू: इलायची पर गौतम बुद्ध
19 वर्षीय अपेक्षा गोखरू ने एक छोटी सी इलायची पर पोस्टर रंगों की मदद से भगवान गौतम बुद्ध की बारीक आकृति उकेरी। यह कलाकृति फरवरी में तैयार की गई थी, जिसे सूक्ष्म कला श्रेणी में वर्ल्ड वाइड बुक में स्थान मिला है। चयन की सूचना उन्हें उसी माह प्राप्त हुई, जबकि प्रमाण पत्र शीघ्र ही मिलने वाला है।
राशि निगम: 5 सेंटीमीटर शंख पर अष्टविनायक
20 वर्षीय राशि निगम ने मात्र 5 सेंटीमीटर के शंख पर भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूप को एक्रेलिक रंगों से चित्रित किया। खास बात यह रही कि उन्होंने यह जटिल आकृति केवल 30 मिनट में पूरी कर दी। उनकी इस उपलब्धि को वर्ल्ड वाइड बुक, इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और यूनिक बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
भूमि कसेरा: मसूर की दाल पर जगन्नाथ त्रिमूर्ति
भूमि कसेरा ने मसूर की दाल के तीन दानों पर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम की अलग-अलग आकृतियां उकेरीं। लगभग 10 मिनट में तैयार की गई इन सूक्ष्म कलाकृतियों ने उन्हें वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।
इन तीनों कलाकारों की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा को आकार से नहीं, मेहनत और समर्पण से पहचाना जाता है।



