विक्रम उत्सव में ‘अंधायुग’ का सशक्त मंचन, नैतिक पतन और मानवता पर गहरा संदेश

नाट्य महोत्सव के सातवें दिन कालिदास अकादमी में दर्शकों को महाभारत के बाद की त्रासदी से कराया रूबरू

उज्जैन, नप्र। उज्जैन में चल रहे विक्रम उत्सव के अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह के सातवें दिन काव्य-नाटक ‘अंधायुग’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. धर्मवीर भारती की इस कालजयी रचना का निर्देशन नई दिल्ली के रंगकर्मी मैस्नाम जॉय मीतेइ ने किया।

कालिदास अकादमी के संकुल भवन में शाम 7:30 बजे से शुरू हुए इस नाटक में महाभारत युद्ध के अंतिम चरण के बाद की घटनाओं को केंद्र में रखा गया। प्रस्तुति में युद्ध के बाद के शोक, आक्रोश और नैतिक द्वंद्व को गहराई से मंच पर जीवंत किया गया। धृतराष्ट्र की विवशता, गांधारी का शोक और अश्वत्थामा की प्रतिशोध की भावना ने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया।

अश्वत्थामा द्वारा पांडव पुत्रों की हत्या और गांधारी द्वारा कृष्ण को दिया गया शाप जैसे मार्मिक प्रसंगों को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। नाटक ने महाभारत के पात्रों को पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर नए नजरिए से देखने का अवसर दिया। मंचन के जरिए यह रेखांकित किया गया कि सत्ता की लालसा, अहंकार और आत्मकेंद्रित निर्णय अंततः समाज और मानवता को गहरे अंधकार में धकेल देते हैं।

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस नाट्य महोत्सव में दर्शकों की अच्छी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती को नमन के साथ हुई। बाद में आचार्य रामराजेश मिश्र (पूर्व कुलपति) और डॉ. जितेंद्र भटनागर ने कलाकारों का सम्मान किया। संचालन राष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज ने किया।

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