सिर्फ110 दिन ही शहर की प्यास बुझा सकता है गंभीर डेम, बारिश नहीं हुई तो बढ़ सकती है जलसंकट की चिंता
मानसून का अंतिम सप्ताह बाकी, अब तक डेम की क्षमता का करीब 30% ही भरा; जिले के 54 जलस्रोतों में भी अपेक्षाकृत कम पानी

उज्जैन। मानसून अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है, लेकिन उज्जैन जिले के जलस्रोतों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। शहर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत गंभीर डेम में फिलहाल कुल क्षमता की तुलना में करीब 30 प्रतिशत पानी ही जमा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक उपलब्ध पानी से शहर की जलापूर्ति करीब 110 दिन तक चलने का अनुमान है।
जिले में बारिश का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अब अंतिम दिनों में होने वाली बारिश पर गंभीर डेम समेत अन्य जलस्रोतों की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी। इस दौरान यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले महीनों में जल प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है।
गंभीर डेम में 754 एमसीएफटी पानी
गंभीर डेम की कुल जल क्षमता करीब 2250 एमसीएफटी बताई गई है। वर्तमान में इसमें लगभग 754 एमसीएफटी पानी मौजूद है। इसमें करीब 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज है, जिसका उपयोग नियमित जलापूर्ति में नहीं किया जा सकता।
इस हिसाब से जलप्रदाय के लिए करीब 654 एमसीएफटी पानी उपलब्ध माना जा रहा है। शहर में प्रतिदिन करीब 8 से 9 एमसीएफटी पानी की आपूर्ति होने की स्थिति में जलस्रोत की उपलब्धता पर लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है।
जिले के 54 जलस्रोत भी पूरी तरह नहीं भर सके
इस मानसून जिले में सामान्य औसत बारिश करीब 36 इंच यानी 910 एमएम मानी जाती है। अब तक करीब 693 एमएम यानी 27.3 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य औसत का लगभग 75 से 80 प्रतिशत है।
बारिश का आंकड़ा औसत के करीब पहुंचने के बावजूद जिले में कई जलस्रोत पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। इसका प्रमुख कारण सीजन के दौरान लगातार और तेज बारिश का अभाव माना जा रहा है। शिप्रा नदी भी इस बार अपेक्षित रूप से उफान पर नहीं आई।
छोटे-बड़े जलस्रोतों में करीब 37% पानी
जिले में कुल 54 डेम और तालाब बताए गए हैं। इनमें अब तक औसतन करीब 37 प्रतिशत पानी ही जमा हो सका है। यानी बड़ी संख्या में जलस्रोत अभी भी अपनी क्षमता से काफी नीचे हैं।
मध्यम परियोजनाओं में अरनिया बहादुरपुर तालाब में करीब 27 प्रतिशत पानी बताया गया है। वहीं इंदौख बैराज में उसकी कुल क्षमता के मुकाबले करीब 69 प्रतिशत पानी जमा होने की जानकारी दी गई है। शेष लघु परियोजनाओं के स्टॉप डेम और तालाबों में भी अपेक्षाकृत कम जलभराव हुआ है।
अंतिम सप्ताह में बारिश पर टिकी उम्मीद
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के अनुसार, इस सीजन में तेज बारिश नहीं होने के कारण जलस्रोतों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया।
अब मौसम विभाग और स्थानीय विशेषज्ञों की नजर सितंबर के अंतिम दिनों पर है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 26 से 30 सितंबर के बीच बारिश के आसार हैं। जिले में इस दौरान करीब 15 से 20 एमएम बारिश होने की संभावना जताई गई है।



