अज़ाक्स ने पूना पैक्ट दिवस को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया
कोठी पैलेस स्थित कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित, पदाधिकारियों ने पूना पैक्ट के ऐतिहासिक संदर्भ और सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर रखे विचार

उज्जैन। कोठी पैलेस स्थित अज़ाक्स कार्यालय में 24 सितंबर को पूना पैक्ट दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। अज़ाक्स जिला उज्जैन ने इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया। कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला अध्यक्ष डॉ. आरएल परमार के नेतृत्व में डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद वक्ताओं ने वर्ष 1932 में हुए पूना पैक्ट की पृष्ठभूमि और उसके सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभावों पर अपने विचार रखे।
पूना पैक्ट के ऐतिहासिक संदर्भ पर चर्चा
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष डॉ. आरएल परमार ने बताया कि 24 सितंबर 1932 को पूना पैक्ट हुआ था। यह समझौता डॉ. बीआर अंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल से जुड़ा था। अगस्त 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड के कम्यूनल अवॉर्ड में ‘डिप्रेस्ड क्लासेज’ के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान किया गया था। इसके विरोध में गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया था।
पूना पैक्ट के तहत पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन प्रणाली और आरक्षित सीटों का प्रावधान किया गया। समझौते में प्रांतीय विधानसभाओं में ‘डिप्रेस्ड क्लासेज’ के लिए 148 सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था।
संगठन ने उठाए राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल
अज़ाक्स के मीडिया प्रभारी डीएल भीलवाड़ा ने कहा कि संगठन पूना पैक्ट के प्रभावों को लेकर चर्चा और जनजागरूकता की जरूरत महसूस करता है। उन्होंने दावा किया कि इसके परिणामस्वरूप वर्तमान समय में समाज के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होते हैं और राजनीतिक आरक्षण की मूल भावना प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को पूना पैक्ट के ऐतिहासिक संदर्भ और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक विमर्श की जानकारी दी जानी चाहिए।
ऐतिहासिक घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पूना पैक्ट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को समझना नई पीढ़ी के लिए जरूरी है। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामाजिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े विषयों पर भी विचार रखे।
कार्यक्रम में प्रांतीय सचिव रमेशचंद्र चांगेसिया, संभागीय अध्यक्ष जगन्नाथ बागड़ी, पूर्व संभागीय सचिव रमेशचंद्र सूर्यवंशी, राजेश सूर्यवंशी, मदनलाल सिंदल, भेरूसिंह परमार, विजय रायकवार, तूफान सिंह पवार, मनीष ललावत, आनंदीलाल सिसोदिया, राजेंद्र हरड सहित अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता और गौरव पेड़वा मौजूद रहे।



