उज्जैन में राष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन का शुभारंभ, CM मोहन यादव बोले- आयुर्वेद भारत की बड़ी देन
धन्वंतरी आयुर्वेद महाविद्यालय में दो दिवसीय सम्मेलन और सिल्वर जुबली पीजी एलुमनाई मीट-2026 शुरू; 11 वैज्ञानिक सत्रों में 220 शोधपत्रों का होगा प्रस्तुतीकरण

उज्जैन, 2 अक्टूबर। शासकीय धन्वंतरी आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, उज्जैन में दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन एवं सिल्वर जुबली पीजी एलुमनाई मीट-2026 का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन संबोधन दिया। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए आयुर्वेद विशेषज्ञ, शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल हुए।
आयुर्वेद के विकास पर सरकार का जोर: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को भारत की महत्वपूर्ण पारंपरिक देन बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार और विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेद ने जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2023 तक प्रदेश में सात आयुर्वेद महाविद्यालय संचालित थे, जबकि वर्तमान सरकार ने नौ नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में पहल की है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में आयुर्वेद वेलनेस और आरोग्य केंद्र विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ इलाकों के लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंच सकें।
समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा पर चर्चा
सम्मेलन के प्रमुख वक्ता और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने आयुर्वेद में स्वास्थ्य की समग्र अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में शारीरिक संतुलन के साथ मन, इंद्रियों और आत्मा की प्रसन्नता को भी स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। उनके अनुसार, प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांत आज भी समग्र स्वास्थ्य की चर्चा में प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश व्यास ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के ऐसे आयोजन आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा पद्धतियों में नवाचार को प्रोत्साहित करने का अवसर देते हैं।
आयुर्वेद अनुसंधान और प्रशिक्षण पर भी विचार
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ओम जैन और विशिष्ट अतिथि रमेशचंद्र शर्मा ने आयुर्वेद की उपयोगिता और जनस्वास्थ्य में इसकी भूमिका पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय आयुष मिशन, मध्यप्रदेश से जुड़े डॉ. राजीव मिश्रा ने बताया कि मिशन की ओर से वैज्ञानिक आयोजनों को प्रोत्साहन और आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। वहीं, अखिल भारतीय आयुर्वेद विशेषज्ञ (पीजी) एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर ने चिकित्सकों के प्रशिक्षण, व्यावसायिक विकास और संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रो. उमेश शुक्ला, डॉ. लुट्टन लाल अहिरवार और डॉ. ए.पी.एस. चौहान ने भी अपने विचार साझा किए।
11 वैज्ञानिक सत्रों में प्रस्तुत होंगे 220 शोधपत्र
आयोजन सचिव डॉ. आशीष शर्मा के अनुसार, सम्मेलन में लगभग 11 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें देशभर से प्राप्त 220 शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। शोधपत्रों में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन, पंचकर्म, औषधीय अनुसंधान और जनस्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यक्रम में डॉ. आशीष शर्मा ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अजयकीर्ति जैन ने संस्थान के इतिहास और परिचय की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. रामतीर्थ शर्मा ने किया और डॉ. श्रद्धा शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध, शिक्षा और चिकित्सकीय नवाचारों को प्रोत्साहन मिलेगा।



