इंदौर में 90 किलो कथित तस्करी के सोने की खरीद का खुलासा, 100 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन; पिता-पुत्र की जमानत खारिज
DRI की जांच में सराफा कारोबारी से जुड़ी सोने की खरीद का मामला सामने आया। कार में 4.72 करोड़ रुपये कीमत के सोने के बिस्किट मिलने के बाद जांच आगे बढ़ी, आरोपियों ने तस्करी के सोने की खरीद से इनकार किया।

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में सोने की कथित तस्करी से जुड़े मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, सराफा कारोबारी दीपक खंडेलवाल और उनके बेटे नकुल खंडेलवाल से जुड़े मामले में पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान करीब 90 किलो सोने की खरीद की जानकारी सामने आई है। इस सोने की अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
जांच एजेंसी को आशंका है कि खरीदा गया सोना विदेश से तस्करी के जरिए भारत लाया गया था और बाद में आभूषण कारोबार के माध्यम से बाजार में खपाया गया। हालांकि, सोने की खरीद और तस्करी से जुड़े आरोपों की जांच जारी है। दोनों आरोपियों ने कथित तस्करी के सोने की खरीद से इनकार किया है। मामले में जिला अदालत ने पिता-पुत्र की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
कार की सीट के नीचे मिले थे 4.72 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट
मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब DRI को सूचना मिली कि कुछ लोग महाराष्ट्र से सोना लेकर इंदौर पहुंच रहे हैं। इस सूचना के आधार पर एजेंसी की टीम ने 14 अगस्त 2026 को एक कार की तलाशी ली। कार में सवार रोमेल और यश लालवानी को पकड़ा गया।
तलाशी के दौरान कार की अगली सीट के नीचे रखे एक बॉक्स से सोने के तीन बिस्किट बरामद किए गए। इनकी कीमत करीब 4.72 करोड़ रुपये बताई गई। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि यह सोना इंदौर के कारोबारी दीपक खंडेलवाल को बेचा जाना था। जांच में तीन किलो सोने के एक सौदे का भी जिक्र सामने आया, जिसमें दो किलो सोना दीपक खंडेलवाल से संबंधित बताया गया। इसके बाद एजेंसी ने मामले की विस्तृत पड़ताल शुरू की।
निखिल लालवानी के जरिए सोने की खरीद की जांच
DRI की जांच में इंदौर के सराफा बाजार स्थित जीडी ज्वेलर्स और दीपक खंडेलवाल व उनके बेटे नकुल खंडेलवाल के बीच संबंधों की पड़ताल की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों को 19 अगस्त को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, निखिल लालवानी के माध्यम से पिछले दो से तीन वर्षों में करीब 90 किलो सोने की खरीद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस सोने की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सोने की आपूर्ति कहां से हुई, उसे किस तरह खरीदा और बेचा गया तथा इन सौदों में सीमा शुल्क से संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे नेटवर्क की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नकद भुगतान से सोना खरीदने वाले ग्राहक भी जांच के दायरे में
करीब 90 किलो सोने की खरीद का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। एजेंसी कथित तौर पर नकद भुगतान करके सोना खरीदने वाले बड़े ग्राहकों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
इसके अलावा, कुछ अन्य सराफा कारोबारियों के संभावित संपर्कों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, किसी अन्य कारोबारी की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
पिता-पुत्र ने आरोपों से किया इनकार, अदालत से नहीं मिली जमानत
दीपक खंडेलवाल और नकुल खंडेलवाल की ओर से अदालत में कथित तस्करी के सोने की खरीद से इनकार किया गया। उनके पक्ष ने कहा कि वे लगभग 20 वर्षों से सराफा कारोबार से जुड़े हैं और उन्होंने ऐसा कोई सोना नहीं खरीदा है।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी बताया गया कि दोनों परिवार के साथ राजस्थान में कुलदेवी के दर्शन के लिए गए थे, उसी दौरान DRI ने उन्हें कोटा में गिरफ्तार किया।
मामले में DRI की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंदन ऐरन ने एजेंसी का पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला अदालत ने दीपक खंडेलवाल और नकुल खंडेलवाल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। मामले में आगे की जांच के दौरान सोने की खरीद, आपूर्ति और लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आने की संभावना है।



