उज्जैन में युवा किसानों को मिला सुरक्षित सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण, नेट हाउस खेती से रोजगार पर जोर
कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा, करीब 35 युवा किसान और किसान महिलाओं ने लिया हिस्सा; विशेषज्ञों ने खेती को व्यवसाय से जोड़ने के बताए तरीके

उज्जैन। खेती को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर इसे रोजगार और व्यवसाय का माध्यम बनाने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र, उज्जैन में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सरल परियोजना के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में युवा किसानों और किसान महिलाओं को नेट हाउस में सुरक्षित सब्जी उत्पादन की तकनीकों से परिचित कराया गया।
“रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से नेट हाउस में सुरक्षित सब्जी की खेती” विषय पर हुए इस कार्यक्रम में उज्जैन जिले के विभिन्न क्लस्टर क्षेत्रों से करीब 35 प्रगतिशील युवा किसान एवं किसान महिलाएं शामिल हुईं। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक खेती से जोड़ने के साथ कम लागत में संरक्षित खेती अपनाकर आय और रोजगार के अवसर बढ़ाना रहा।
ऑनलाइन प्रशिक्षण से लेकर खेत तक कराया गया व्यावहारिक अनुभव
पांच दिनों के दौरान प्रतिभागियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं के साथ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और फील्ड विजिट के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि संरक्षित खेती को व्यावसायिक मॉडल के रूप में अपनाने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
संस्था प्रमुख एवं प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. ए.के. दीक्षित ने शेड नेट हाउस में सुरक्षित सब्जी उत्पादन के प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी दी। उन्होंने किसानों को संरक्षित खेती में उत्पादन बढ़ाने और इसे रोजगार से जोड़ने के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
शेड नेट और पॉलीहाउस तकनीक की दी जानकारी
परियोजना की नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेखा तिवारी ने संरक्षित खेती के अलग-अलग मॉडल समझाए। इनमें शेड नेट हाउस, पॉलीहाउस, पॉलीनेट हाउस और लो टनल हाउस प्रमुख रहे।
उन्होंने पौध तैयार करने की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। इसके अलावा छोटे और सीमांत किसानों के लिए अपेक्षाकृत कम लागत में नेट हाउस तैयार करने की जानकारी दी गई।
FPO से लेकर जैविक खेती तक पर विशेषज्ञों ने समझाया
प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञों ने किसानों का मार्गदर्शन किया।
डॉ. हंसराज जाटव ने रोजगार आधारित कृषि व्यवसाय में एफपीओ की भूमिका बताई, जबकि डॉ. एस.के. सिंह ने सुरक्षित खेती में जैविक खेती के घटकों के उपयोग पर जानकारी दी।
डॉ. आशीष बोबड़े ने संरक्षित सब्जी उत्पादन में आने वाले कीट एवं रोगों की पहचान और उनके प्रबंधन के तरीके समझाए। वहीं डॉ. सविता कुमारी ने प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घनामृत और बीजामृत जैसे जैविक घटकों के इस्तेमाल की जानकारी दी।
उत्पादों के निर्यात से बढ़ सकता है कारोबार
प्रशिक्षण में सुरक्षित खेती से तैयार होने वाले कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और व्यवसाय का विस्तार करने पर भी चर्चा हुई। डॉ. मोनी सिंह ने किसानों को निर्यात के माध्यम से संरक्षित खेती से मिलने वाले उत्पादों का कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र लहर से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. करणवीर सिंह ने नेट हाउस में उगाई जाने वाली विभिन्न सब्जियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पॉलीहाउस में मिर्च-टमाटर की फसल पर विशेष जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के संस्था प्रमुख डॉ. सी.पी. पचौरी ने ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण में भाग लिया। उन्होंने पॉलीहाउस में मिर्च और टमाटर की फसल में होने वाले रोगों तथा उनके प्रबंधन की जानकारी दी। साथ ही पॉलीहाउस निर्माण के दौरान किन तकनीकी बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पर भी किसानों को समझाया।
नर्सरी और प्रगतिशील किसान के खेत का कराया भ्रमण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फील्ड विजिट भी कराई गई। इसके तहत उद्यानिकी विभाग की नर्सरी का भ्रमण कराया गया। इसके अलावा आगर-मालवा क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान के खेत पर ले जाकर संरक्षित खेती की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विभिन्न गांवों से पहुंचे किसान
प्रशिक्षण में सामगी, गोलवा, कल्याणपुर, देवरा खेड़ी, बूचाखेड़ी, चिंतामन जवासिया, बदरखा बाबाजी, लिंबापिपलिया, छावनी, लक्ष्मीनारायण, बिछड़ोद, आनंद खेड़ी, साकरी, गोपाली, सेवर खेड़ी, जीताखेड़ी, गुनाइजागीर, सरोला, सालाखेड़ी, बरखेड़ा नजिक सहित उज्जैन क्षेत्र के किसान शामिल हुए।
करीब 35 युवा किसान और किसान महिलाओं ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने आधुनिक एवं संरक्षित खेती से जुड़ी जानकारी को भविष्य में खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में उपयोगी बताया।



