महाकाल मंदिर प्रशासन का बड़ा फैसला, श्रावण में बदलेगा दर्शन और भस्म आरती का समय

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन मार्ग, जल अर्पण और पार्किंग व्यवस्था का विस्तृत प्लान जारी।

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भाद्रपद मास की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था, भस्म आरती के समय, सवारी मार्ग और पार्किंग व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना तैयार कर ली है। श्रावण मास के दौरान प्रत्येक सोमवार भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर के पट सामान्य दिनों से पहले खोले जाएंगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक कलेक्टर एवं समिति अध्यक्ष रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में श्रावण-भाद्रपद मास के दौरान होने वाले धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

सोमवार को सुबह 2:30 बजे खुलेंगे मंदिर के पट

मंदिर प्रशासन के अनुसार 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रतिदिन प्रातःकालीन भस्म आरती के लिए मंदिर के पट सुबह 3 बजे खोले जाएंगे। वहीं श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए मंदिर के पट सुबह 2:30 बजे खोले जाएंगे। सोमवार को भस्म आरती का समय सुबह 2:30 से 4:30 बजे तथा अन्य दिनों में 3 से 5 बजे तक निर्धारित किया गया है।

3 अगस्त से शुरू होगी महाकाल की सवारी

श्रावण मास में भगवान महाकाल की चार पारंपरिक सवारियां निकाली जाएंगी। पहली सवारी 3 अगस्त, दूसरी 10 अगस्त, तीसरी 17 अगस्त और चौथी 24 अगस्त को निकलेगी। इसके बाद भाद्रपद मास में 31 अगस्त को पंचम सवारी तथा 7 सितंबर को भगवान महाकाल की भव्य राजसी (शाही) सवारी निकाली जाएगी।

सवारी मार्ग रहेगा पूर्ववत

मंदिर प्रबंध समिति ने इस वर्ष सवारी मार्ग में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। भगवान महाकाल की सवारी मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी।

दर्शन व्यवस्था रहेगी सुव्यवस्थित

श्रावण-भाद्रपद मास में सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश त्रिवेणी संग्रहालय क्षेत्र से नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम के रास्ते कराया जाएगा। वहीं नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अलग प्रवेश एवं निकास व्यवस्था रहेगी। जल अर्पण की व्यवस्था सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में विशेष जलपात्रों के माध्यम से की जाएगी।

इन स्थानों पर रहेगी पार्किंग

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल अन्नक्षेत्र के समीप स्थित खाली मैदान, मेघदूत वन पार्किंग, नीलकंठ पार्किंग, चारधाम पार्किंग, कर्कराज पार्किंग तथा कार्तिक मेला ग्राउंड को पार्किंग स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है।

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