सिंहस्थ-2028 के लिए MP पुलिस का हाईटेक प्लान, AI और क्राउड साइकोलॉजी से संभाली जाएगी करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़

लोकेशन आधारित ट्रेनिंग, AI प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और ऑपरेशनल जोन मॉडल पर होगी सुरक्षा व्यवस्था; भगदड़ जैसी घटनाओं को पहले ही रोकने पर रहेगा फोकस

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। इस बार करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल पारंपरिक पुलिसिंग पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिहेवियरल साइंस और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात होने वाले अधिकारियों को आयोजन शुरू होने से काफी पहले ही उनके निर्धारित क्षेत्र का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। घाटों, प्रमुख मार्गों, गलियों, प्रवेश एवं निकास बिंदुओं के साथ-साथ संभावित भीड़भाड़ वाले स्थानों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लिया जा सके।

AI करेगा भीड़ का रियल टाइम विश्लेषण

नई रणनीति के तहत AI आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग कर भीड़ की आवाजाही, संभावित जाम और संवेदनशील स्थानों का पहले से आकलन किया जाएगा। इससे पुलिस समय रहते अतिरिक्त बल तैनात कर सकेगी और भगदड़ जैसी स्थितियों को रोकने में मदद मिलेगी।

क्राउड साइकोलॉजी पर विशेष प्रशिक्षण

पुलिसकर्मियों को केवल सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि भीड़ के व्यवहार और मनोविज्ञान को समझने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे तनावपूर्ण परिस्थितियों में भीड़ को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

छोटे-छोटे ऑपरेशनल जोन में होगा विभाजन

उज्जैन जोन के एडीजी राकेश गुप्ता के अनुसार सिंहस्थ क्षेत्र को कई ऑपरेशनल जोन में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में तैनात अधिकारी अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, यातायात व्यवस्था और भीड़ के पैटर्न से पूरी तरह परिचित होंगे। इससे किसी भी स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।

सिंहस्थ-2028 की नई पुलिसिंग रणनीति

  • लोकेशन आधारित ऑन-ग्राउंड प्रशिक्षण
  • AI आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग
  • क्राउड साइकोलॉजी पर विशेष फोकस
  • संवेदनशील क्षेत्रों का ऑपरेशनल जोन में विभाजन
  • हादसों को रोकने के लिए प्रिवेंटिव पुलिसिंग मॉडल

मध्य प्रदेश पुलिस का मानना है कि आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और व्यवहारिक प्रशिक्षण के समन्वय से सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाई जा सकेगी।

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