उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय में 400 साल पुराने दुर्लभ दीपकों की प्रदर्शनी, इतिहास से रूबरू हो रहे पर्यटक
'अभ्यर्धना' प्रदर्शनी में मराठा काल और दक्षिण भारत के प्राचीन दीप आकर्षण का केंद्र, भारतीय शिल्पकला की अनूठी विरासत का प्रदर्शन

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन का त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय इन दिनों इतिहास और भारतीय शिल्पकला के अद्भुत संगम का साक्षी बना हुआ है। संग्रहालय में आयोजित ‘अभ्यर्धना’ दीप प्रदर्शनी में मराठा काल सहित विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों के लगभग 400 वर्ष पुराने दुर्लभ दीपक प्रदर्शित किए गए हैं। इन प्राचीन धरोहरों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक, शोधकर्ता और कला प्रेमी संग्रहालय पहुंच रहे हैं।
प्रदर्शनी में महाराष्ट्र, दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से संग्रहित लगभग 200 पारंपरिक दीपक, प्राचीन चिमनियां और धातु शिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें कई दीप ऐसे हैं, जिनका उपयोग कभी राजमहलों, मंदिरों और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता था।
राजमहलों की रोशनी से जुड़ी है इन दीपों की विरासत
संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी आदित्य चौरसिया के अनुसार, प्राचीन समय में ये दीप केवल प्रकाश का माध्यम नहीं थे, बल्कि समृद्धि, आस्था और भारतीय शिल्पकला के प्रतीक भी माने जाते थे। प्रदर्शनी में शामिल मयूर आकृति, बारीक नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन वाले मराठा कालीन दीपक दर्शकों का विशेष आकर्षण बने हुए हैं।
सिंहस्थ की सौगात बना संस्कृति का प्रमुख केंद्र
वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व के दौरान स्थापित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय आज भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व को जानने का प्रमुख केंद्र बन चुका है। महाकाल लोक आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचकर सदियों पुरानी कलात्मक धरोहरों का अवलोकन कर रहे हैं।
2023 से लगातार लग रही है विशेष प्रदर्शनी
संग्रहालय प्रबंधन द्वारा वर्ष 2023 से ‘अभ्यर्धना’ दीप प्रदर्शनी का नियमित आयोजन किया जा रहा है। हर वर्ष आयोजित होने वाली यह प्रदर्शनी भारतीय धातु कला, प्राचीन शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।



