कैलाश विजयवर्गीय के आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे छात्र, दो हिरासत में

नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर के भंवरकुआं क्षेत्र में धरना जारी; दिल्ली की घटना और छात्रों पर कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने सदन में किया हंगामा

इंदौर/भोपाल, 22 जुलाई 2026। नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर इंदौर में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार सुबह प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्र मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर पहुंच गए। यहां नारेबाजी और विरोध के दौरान पुलिस ने दो छात्रों को हिरासत में ले लिया।

छात्रों का कहना था कि वे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री विजयवर्गीय पर युवाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप भी लगाया। हालांकि सत्ता पक्ष ने इस आरोप को खारिज किया है।

मंत्री विजयवर्गीय के घर के बाहर तैनात जवान।

भंवरकुआं चौराहे पर जारी है धरना

नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा भंवरकुआं चौराहे पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारी पोस्टर, बैनर और तख्तियां लेकर परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग करते दिखाई दिए।

मंगलवार से शुरू हुआ विरोध बुधवार को भी जारी रहा। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

पुलिस करा रही प्रदर्शन की वीडियोग्राफी

पुलिस के अनुसार भंवरकुआं चौराहे पर चल रहे धरने के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शन स्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है और गतिविधियों की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित करने या नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जा सकती है।

विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का विरोध

इंदौर में चल रहे छात्र आंदोलन के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं से कथित मारपीट का मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठा। कांग्रेस विधायकों ने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा कराने की मांग की।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि युवाओं की आवाज दबाई जा रही है और उनकी समस्याओं पर सरकार चर्चा से बच रही है। विपक्षी विधायकों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर विद्यार्थियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की।

अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंचे विपक्षी सदस्य

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि मंत्री की कथित टिप्पणी रिकॉर्ड पर उपलब्ध है। इसी बात को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कांग्रेस विधायक अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी अपने स्थान पर खड़े होकर विरोध दर्ज कराया।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जिस घटना को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिया गया है, वह मध्य प्रदेश से संबंधित नहीं है। इसलिए विधानसभा के नियमों के तहत उस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती।

विधानसभा अध्यक्ष ने भी घटना को राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी जारी रहने पर सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

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