विजयादशमी पर निकलेगी भगवान महाकाल की सवारी, 500 किलो फूलों की होगी वर्षा
20 अक्टूबर को शाम 4 बजे मंदिर से शुरू होगी पारंपरिक सवारी, दशहरा मैदान में होगा भगवान मनमहेश और शमी वृक्ष का पूजन। रंगोली, आदिवासी नृत्य, भजन मंडलियों और वैदिक मंत्रोच्चार से सजेगा सवारी मार्ग।

उज्जैन, 19 अक्टूबर 2026। विजयादशमी के पावन अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। सवारी शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से प्रारंभ होगी और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां भगवान श्री मनमहेश का पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही परंपरानुसार शमी वृक्ष की पूजा भी संपन्न होगी।
सवारी के मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल की ओर से पालकी में विराजित भगवान श्री मनमहेश को सलामी दी जाएगी। इस वर्ष सवारी को भव्य रूप देने के लिए पुष्पवर्षा, रंगोली, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और वैदिक मंत्रोच्चार सहित विभिन्न आयोजन किए जाएंगे।
ड्रोन से होगी 500 किलो फूलों की वर्षा
विजयादशमी पर निकलने वाली सवारी में श्रद्धालुओं के लिए कई विशेष आकर्षण रहेंगे। भगवान की पालकी पर ड्रोन के माध्यम से लगभग 500 किलो फूलों की वर्षा की जाएगी। सवारी मार्ग पर करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में रंगोली सजाई जाएगी। इसके अलावा लाइव पेंटिंग के जरिए भी आयोजन को विशेष स्वरूप दिया जाएगा।
सवारी में श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड और पुलिस बैंड की प्रस्तुतियां होंगी। लगभग 10 आदिवासी जनजातीय नृत्य दल अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, पांच एलईडी रथों के माध्यम से सवारी का प्रसारण किया जाएगा, ताकि मार्ग पर मौजूद श्रद्धालु आयोजन को बेहतर तरीके से देख सकें।
300 वैदिक बटुक करेंगे मंत्रोच्चार
भगवान महाकाल की सवारी में करीब 10 भजन मंडलियां शामिल होंगी। लगभग 300 वैदिक बटुक वैदिक मंत्रों का उच्चारण करेंगे। इसके साथ रजत ढोल वादन, तोपची कड़ाबीन, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, कांग्रेस सेवा दल और मार्ग उद्घोषक भी सवारी का हिस्सा रहेंगे।
आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम देखने को मिलेगा। मंदिर प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से सवारी की व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
इन प्रमुख मार्गों से गुजरेगी भगवान महाकाल की सवारी
मंदिर से निकलने के बाद सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सती गेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुंडा चौराहा, टावर मार्ग और शहीद पार्क से होकर आगे बढ़ेगी।
इसके बाद घास मंडी चौराहा, माधवनगर अस्पताल, पुलिस कंट्रोल रूम और एलआईसी कार्यालय होते हुए लिननध्रेमंड शोरूम के समीप स्थित गली से दशहरा मैदान पहुंचने का मार्ग निर्धारित किया गया है। दशहरा मैदान में भगवान की पालकी का स्वागत किया जाएगा और भगवान श्री मनमहेश तथा शमी वृक्ष का पूजन होगा।
पूजन के बाद इस रास्ते से लौटेगी सवारी
दशहरा मैदान में पूजन संपन्न होने के बाद वापसी यात्रा शुरू होगी। सवारी गंगा होटल मार्ग, देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड, धन्नालाल की चाल, लोक निर्माण विभाग कार्यालय, फ्रीगंज ओवरब्रिज और संख्याराजे धर्मशाला से होकर गुजरेगी।
इसके बाद देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा, इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ब्रिज, बेगमबाग और कोट मोहल्ला चौराहे से होते हुए भगवान की पालकी पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम
सवारी के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों को जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे मार्ग पर साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा और फायर ब्रिगेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
संध्या पूजन के बाद होंगे भगवान महाकाल के मुखारविंद दर्शन
विजयादशमी के अवसर पर मंदिर के गर्भगृह में संध्या पूजन के बाद श्रद्धालु भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री होल्कर स्वरूप यानी मुखारविंद के दर्शन कर सकेंगे। इस परंपरा के तहत भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाते हैं। इसी अवसर पर मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन भी किया जाएगा।
इस प्रकार विजयादशमी पर निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी में धार्मिक परंपरा, वैदिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विशेष आयोजन होगा।



