शाही मस्जिद को लेकर विरोध तेज, सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ मुस्लिम समाज जुटा
सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण में मस्जिद का हिस्सा प्रभावित, हाईकोर्ट में अपील पर सोमवार को सुनवाई संभावित

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण को लेकर शाही मस्जिद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सड़क विस्तार की प्रस्तावित सीमा में मस्जिद का हिस्सा आने के विरोध में मुस्लिम समाज के लोग शनिवार रात से मस्जिद परिसर के आसपास एकत्रित होने लगे। रविवार को भी लोगों की मौजूदगी बनी रही।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए गए हैं, जबकि पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की तैयारी की गई है।
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ युगलपीठ में अपील
शाही मस्जिद से जुड़े मामले में पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ की एकलपीठ के समक्ष याचिका दायर की गई थी। 9 सितंबर को एकलपीठ ने नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत के आदेश में सड़क चौड़ीकरण को सिंहस्थ-2028 के दौरान यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा विषय माना गया था।
इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से इस फैसले को चुनौती देते हुए युगलपीठ में अपील दायर की गई। 26 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को समय समाप्त होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए रखी गई थी।
मस्जिद पक्ष ने कार्रवाई पर जताई आपत्ति
शाही मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि समाज सड़क चौड़ीकरण के विकास कार्य में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन धार्मिक स्थल को हटाने के बजाय उसके हिस्से को बचाते हुए रास्ता चौड़ा किया जाना चाहिए।
इमाम का कहना है कि मस्जिद पुरानी संरचना है और इसके ढांचे में मामूली छेड़छाड़ से भी नुकसान की आशंका है। मस्जिद पक्ष की ओर से पूर्व में भी इसके ऐतिहासिक दस्तावेज और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला दिया गया है।
सिंहस्थ के लिए गोपाल मंदिर मार्ग का चौड़ीकरण
नगर निगम और प्रशासन के अनुसार, गोपाल मंदिर क्षेत्र का मार्ग शहर के प्रमुख संपर्क रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है।
हाईकोर्ट के 9 सितंबर के आदेश में भी इस मार्ग को गोपाल मंदिर से महाकाल मंदिर और आगे क्षिप्रा नदी क्षेत्र से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बताया गया है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार प्रस्तावित चौड़ीकरण का उद्देश्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ के दबाव को नियंत्रित करना है।
नगर निगम का पक्ष है कि कार्रवाई निर्धारित विकास योजना और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। वहीं, मस्जिद पक्ष ने न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आपत्ति रखी है। मामले में अगली सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।



