39 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए शैलेंद्र व्यास, देहदान और नेत्रदान का लिया संकल्प
राष्ट्रपति व राज्यपाल सम्मानित शिक्षक ने सेवानिवृत्ति पर दिया समाजसेवा का संदेश, शिक्षा और मानवीय मूल्यों को बताया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी

शिक्षा जगत में 39 वर्षों तक सेवा देने वाले, राष्ट्रपति और राज्यपाल से अलंकृत शिक्षक शैलेंद्र व्यास स्वामी मुस्कुराके सेवानिवृत्त हो गए हैं। अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने समाज के लिए अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से देहदान और नेत्रदान का संकल्प लिया है। उन्होंने गीता भवन न्यास बडनगर को नेत्रदान और आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को देहदान करने का प्रामाणिक दस्तावेज भी प्राप्त कर लिया है। शालिग्राम तोमर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित ने सम्मान समारोह में कहा कि शिक्षा संजीवनी बूटी है और शिक्षक सुषेण वैद्य। शैलेंद्र व्यास ने शिक्षा, संस्कार, क्रीड़ा, समाज सेवा, साहित्य, हास्य व्यंग्य और अनुशासन से विद्यालय को महकाया है। उन्होंने बेदाग सेवाकाल में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उज्जैन को गौरवान्वित किया है। सम्मान के प्रतिउत्तर में पंडित शैलेंद्र व्यास ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि शिक्षार्थी को समाज के विभिन्न आयामों से तराशना भी है। शिक्षक पुरुषोत्तम विष्णु ने बताया कि प्रधानाध्यापक व्यास ने विद्यालय के सर्वांगीण विकास, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और गरीब विद्यार्थियों को स्वेटर, कॉपियां व बैग्स प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समारोह की अध्यक्षता क्षता प्रभारी प्रधानाध्यापक ममता मिश्रा ने की तथा विशेष अतिथि हेमा व्यास थीं। सरस्वती वंदना प्रियंका सोलंकी और मनीष गुप्ता ने प्रस्तुत की। अभिनंदन पत्र का वाचन भारती गोमे ने किया। समारोह का संचालन वरिष्ठ शिक्षक संजय अस्थाना ने किया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के चंद्रभान सिंह दोहरे, सीमा सिसोदिया, लता शिंदे, योगेश शर्मा और ए.के. मालवीय ने शाल, श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। आभार राकेश जोशी ने माना।



