उज्जैन में 16 फीट तक की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार, 1000 से ज्यादा स्थानों पर होगी स्थापना

नवरात्रि के लिए पंडालों को सजाने में जुटीं समितियां, कोलकाता से आए कारीगर बना रहे मिट्टी की प्रतिमाएं; कच्चे माल की कीमत बढ़ने से मूर्तियों के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़े

उज्जैन। शारदीय नवरात्रि को लेकर उज्जैन में उत्साह का माहौल है। शहर में जगह-जगह दुर्गा पंडालों को सजाने की तैयारियां चल रही हैं, वहीं मूर्ति कलाकार माता की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बार शहर में 4 से लेकर 16 फीट तक ऊंची दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। जिले में नवरात्रि के दौरान 1000 से अधिक स्थानों पर माता की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है।

प्रतिमा निर्माण में जुटे बंगाल के कारीगर पारंपरिक स्वरूपों के साथ अलग-अलग थीम पर मूर्तियां बना रहे हैं। इनमें महिषासुर मर्दिनी और पर्यावरण आधारित प्रतिमाएं भी शामिल हैं। पंडाल समितियां स्थापना से पहले प्रतिमाओं को ले जाने और सजावट सहित अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रही हैं।

4 से 16 फीट तक की प्रतिमाएं, अलग-अलग स्वरूपों की मांग

उज्जैन में दुर्गा प्रतिमाएं बनाने वाले कलाकार विजय पाल के मुताबिक, इस बार विभिन्न आकार और स्वरूपों की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। कोलकाता से आए कारीगरों को एक प्रतिमा बनाने में करीब 4 से 5 दिन का समय लगता है।

प्रतिमाओं में पारंपरिक कलाकारी के साथ माता के विभिन्न रूपों को उकेरा गया है। नवरात्रि के दौरान पंडालों में स्थापना के लिए समितियां अपनी जरूरत और उपलब्ध स्थान के अनुसार प्रतिमाएं तैयार करवा रही हैं।

कच्चा माल महंगा, मूर्तियों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत बढ़ोतरी

इस बार प्रतिमा निर्माण की लागत बढ़ने का असर कीमतों पर भी पड़ा है। कलाकार विजय पाल के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के चलते दुर्गा प्रतिमाओं के दाम पिछले स्तर की तुलना में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

मूर्तियों को तैयार करने में लगने वाली सामग्री और कारीगरों की मेहनत के कारण प्रतिमा की कीमत उसके आकार और डिजाइन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

कोलकाता की मिट्टी से बन रहीं पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाएं

उज्जैन में तैयार की जा रही प्रतिमाओं के लिए मिट्टी कोलकाता से मंगाई जा रही है। कलाकारों के अनुसार, इन प्रतिमाओं के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। मूर्तियां मिट्टी से बनाई जा रही हैं और रंगाई में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है।

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पारंपरिक मूर्तिकला को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया जा रहा है।

जिले में 1000 से ज्यादा जगहों पर होगी स्थापना

नवरात्रि के दौरान उज्जैन जिले में 1000 से अधिक स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। इसके लिए विभिन्न समितियां पंडालों की सजावट, बिजली, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़े इंतजाम कर रही हैं।

बड़ी संख्या में पंडाल स्थापित होने को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने आयोजन समितियों से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।

पंडालों में CCTV लगाने और देर रात तेज आवाज में DJ नहीं बजाने की अपील

पुलिस-प्रशासन ने दुर्गा उत्सव समितियों से पंडालों में CCTV कैमरे लगाने और गतिविधियों पर निगरानी रखने को कहा है। इसके अलावा देर रात DJ नहीं बजाने की अपील भी की गई है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी न हो और उत्सव के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे।

नवरात्रि नजदीक आने के साथ ही प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने और पंडाल तैयार करने का काम तेज हो गया है। आने वाले दिनों में शहर के अलग-अलग इलाकों में दुर्गा उत्सव की रौनक दिखाई देने लगेगी।

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