21 से 27 नवंबर तक होगा अखिल भारतीय कालिदास समारोह, तैयारियों पर स्थानीय समिति ने की चर्चा
युवाओं को कालिदास साहित्य और मालवा की संस्कृति से जोड़ने पर जोर, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवा कलाकारों को मौका देने के सुझाव

उज्जैन, 25 सितंबर। महाकवि कालिदास की साहित्यिक परंपरा और उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अखिल भारतीय कालिदास समारोह-2026 की तारीख तय कर दी गई है। इस वर्ष सात दिवसीय आयोजन 21 से 27 नवंबर तक होगा। समारोह की तैयारियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर शुक्रवार को कालिदास संस्कृत अकादमी के सभागार में स्थानीय समिति की बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता स्थानीय समिति के उपाध्यक्ष एवं संभागायुक्त आशीष सिंह ने की। इसमें राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, कलेक्टर एवं समिति के सदस्य-सचिव रौशन कुमार सिंह सहित साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद, पत्रकार और अन्य सदस्य शामिल हुए।
युवाओं को कालिदास और मालवा की संस्कृति से जोड़ने पर जोर
बैठक में समारोह के स्वरूप से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न अकादमिक आयोजनों पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज ने कहा कि कालिदास समारोह के जरिए महाकवि कालिदास के साहित्य और चिंतन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने समारोह में मालवा की लोक-संस्कृति और प्राचीन विद्याओं को भी प्रमुखता देने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि नई पीढ़ी साहित्य, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ सके।
युवा कलाकारों और रचनाकारों को मंच देने का सुझाव
संभागायुक्त आशीष सिंह ने कहा कि कालिदास समारोह की अपनी विशिष्ट पहचान है और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए युवाओं की रुचि के अनुरूप कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने समारोह में युवा वर्ग के बीच लोकप्रिय कलाकारों और रचनाकारों को आमंत्रित करने का सुझाव दिया। बैठक में सामने आए सुझावों को आगे केंद्रीय समिति के समक्ष रखने की बात भी कही गई।
उद्घाटन और समापन कार्यक्रम पर भी मंथन
स्थानीय समिति की बैठक में समारोह के उद्घाटन और समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सारस्वत अतिथि को लेकर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, कालिदास संस्कृत अकादमी और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय कालिदास चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी को लेकर भी चर्चा हुई।
बैठक में पत्रकार निरूक्त भार्गव, अर्जुनसिंह चंदेल और वरुण श्रीमाली, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र और प्रेमचंद सृजनपीठ के निदेशक मुकेश जोशी सहित अन्य सदस्यों ने अपने सुझाव रखे।
सात दिन तक होंगे अलग-अलग आयोजन
कालिदास समारोह के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक और अकादमिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। कालिदास संस्कृत अकादमी की ओर से सप्त-दिवसीय नाट्य समारोह के साथ चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी और प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
वहीं, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की ओर से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर शैक्षणिक और साहित्यिक कार्यक्रम होंगे। आयोजन के तहत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी और पं. सूर्यनारायण व्यास स्मृति व्याख्यान भी प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा कालिदास संस्कृत अकादमी में परिचर्चा, राष्ट्रीय संगोष्ठी, महाकवि कालिदास व्याख्यान और संस्कृत कवि समवाय सहित कई सारस्वत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह, समाजसेवी नरेश शर्मा, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजीव मालवीय, श्रीपाद जोशी, रूप पमनानी, शिव चौरसिया, प्रो. बालकृष्ण शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और जिला पंचायत के सीईओ श्रेयांश कूमट सहित कलाकार, रंगकर्मी, संगीतज्ञ, साहित्यकार और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।



