जीवाजी वेधशाला में दिखा शरद सम्पात का खगोलीय नजारा, अब घटेगा दिन और बढ़ेगी रात

जीवाजी वेधशाला में जुटे खगोलप्रेमी और नागरिक; ऐतिहासिक यंत्रों से समझी सूर्य की स्थिति और दिन-रात के बदलाव की प्रक्रिया

उज्जैन। सूर्य की स्थिति में बदलाव के साथ उत्तरी गोलार्ध में ऋतु परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है। उज्जैन की शासकीय जीवाजी वेधशाला में बुधवार को ‘शरद सम्पात’ की खगोलीय घटना को देखने के लिए दिनभर खगोलप्रेमियों, युवाओं और शोधार्थियों की आवाजाही रही। वेधशाला के ऐतिहासिक यंत्रों की मदद से लोगों ने इस विशेष खगोलीय घटना को समझा और प्रत्यक्ष रूप से देखा।

सूर्य विषुवत रेखा के ऊपर रहा लंबवत

शरद सम्पात के दौरान सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लगभग लंबवत पड़ती हैं। इस दौरान पृथ्वी के दोनों गोलार्धों में दिन और रात की अवधि लगभग बराबर रहती है। उज्जैन में भी बुधवार को दिन और रात करीब 12-12 घंटे के रहे।

वेधशाला पहुंचे लोगों के लिए यहां मौजूद प्राचीन खगोलीय यंत्र इस घटना को समझने का प्रमुख माध्यम बने। शंकु यंत्र की छाया में होने वाले बदलाव को पूरे दिन देखा गया।

नाड़ीवलय यंत्र से समझी सूर्य की स्थिति

शरद सम्पात के मौके पर नाड़ीवलय यंत्र भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। यंत्र पर सूर्य की स्थिति और धूप में होने वाले बदलाव के जरिए विशेषज्ञों ने आगंतुकों को समझाया कि सूर्य के दक्षिण की ओर बढ़ने के साथ मौसम और दिन-रात की अवधि में किस तरह परिवर्तन आता है।

इस खगोलीय घटना को देखने पहुंचे युवाओं और शोधार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कई लोगों ने वेधशाला के ऐतिहासिक उपकरणों के माध्यम से सूर्य की गति और पृथ्वी से उसके संबंध को समझने में रुचि दिखाई।

अब धीरे-धीरे लंबी होंगी रातें

शरद सम्पात के बाद सूर्य का आभासी पथ दक्षिण की ओर बढ़ता है। इसके साथ उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि धीरे-धीरे कम और रातें लंबी होने लगती हैं। यह बदलाव दिसंबर के शीत अयनांत तक जारी रहता है।

जीवाजी वेधशाला में इस खगोलीय घटना को देखने पहुंचे नागरिकों ने इसे विज्ञान और खगोल विज्ञान को करीब से समझने का एक अनूठा अवसर बताया।

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