उज्जैन में उमा सांझी महोत्सव की तीसरी शाम लोक संस्कृति के नाम, भजनों और लोकनृत्यों ने मोहा मन

ग्वालियर के ढोली बुवा महाराज ने किया नारदीय कीर्तन, इंदौर-मंदसौर और उज्जैन के कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां; 9 अक्टूबर को रंगोली प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

उज्जैन, 8 अक्टूबर 2026। श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित उमा सांझी महोत्सव के तीसरे दिन धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। सायंकालीन आरती के बाद सभा मंडप में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोक गायन, मालवी और राजस्थानी लोकनृत्य तथा भक्ति गीतों ने आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं और दर्शकों का मन मोह लिया।

नारदीय कीर्तन और पारंपरिक झांकियों ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक

महोत्सव के तीसरे दिन शाम 5 बजे ग्वालियर से आए योगेश पुरन्दरे, जिन्हें ढोली बुवा महाराज के नाम से जाना जाता है, ने नारदीय कीर्तन प्रस्तुत किया। सभा मंडप में प्राचीन शिला पर किलाकोट की रंगोली भी बनाई गई। इस रंगोली के निर्माण में मुकेश शर्मा, भूषण व्यास, संदीप शर्मा, ईशान व्यास, गोपाल शर्मा, अक्षय शर्मा और अनंतनारायण शर्मा सहित अन्य लोगों ने योगदान दिया।

कोटितीर्थ कुंड में नौका विहार के दौरान भगवान महादेव के मुखौटे को विराजित किया गया। वहीं, प्रदोष पर्व के अवसर पर सभा मंडप में चौपड़ खेलते हुए मां उमा और भगवान महेश की झांकी सजाई गई। गज के आसन पर भगवान चंद्रमौलेश्वर को विराजित कर धार्मिक परंपराओं को दर्शाया गया।

इंदौर की शीतल अत्रे ने भक्ति गीतों से बांधा समां

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पहली प्रस्तुति इंदौर की शीतल अत्रे के लोक गायन समूह ने दी। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और गणेश भजन से हुई। इसके बाद भगवान भोलेनाथ, गणगौर महापर्व, मां अम्बे और संत सिंगाजी से जुड़े भजनों एवं गीतों की प्रस्तुति दी गई।

इस दौरान अनुषा अत्रे ने सह गायन किया। हर्षद शेवगांवकर ने हारमोनियम, विजय गंगोलिया ने ढोलक और गगन शर्मा ने ऑक्टोपैड पर संगत की।

मंदसौर के लोकगीतों में महाकाल भक्ति की झलक

दूसरी प्रस्तुति मंदसौर की गायत्री धाकड़ के लोक गायन समूह की रही। समूह ने ‘जरा-जरा धीरे-धीरे गाड़ी हांको, म्हारा राम गाड़ी वारा’ गीत से शुरुआत की। इसके बाद ‘एक डाल दो पंछी बैठा’, ‘मेरा भोला है भंडारी’, ‘क्यूं नि आयो रे’, ‘सोना रा मुकुट में’ और ‘महाकाल सरकार, मेरे महाकाल सरकार’ जैसे गीत प्रस्तुत किए।

समूह ने ‘खम्मा रे खम्मा महाकाल सरकार जी ने खम्मा’, ‘तेरी जय-जयकार लगाऊंगा’ और ‘घोड़ो मारो छम-छम करतो आवे’ सहित अन्य लोकगीतों से भी श्रोताओं को जोड़े रखा। अंतिम प्रस्तुति ‘मारो हेलो सुनो नी रामा पीर’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस प्रस्तुति में पिकेंश धाकड़, गुरुदत्त मेहता, सुनील गंधर्व, लक्ष्य दत्त मेहता और दीपक गंधर्व ने संगीत संगत की।

उज्जैन के कलाकारों ने मालवी और राजस्थानी लोकनृत्यों से जीता दिल

तीसरी और अंतिम प्रस्तुति उज्जैन की प्रतिभा संगीत कला समूह ने दी। संस्था की निदेशिका प्रतिभा रघुवंशी के मार्गदर्शन में कलाकारों ने मालवी और राजस्थानी लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘प्यारों लागे रे म्हारो मालवो देस’ से हुई। इसके बाद ‘चटके चुमड़ली ओ चंदा’ पर पणिहारी लोकनृत्य, ‘खम्मा घणी’ और ‘चूड़ी चमके’ की प्रस्तुतियां हुईं। समापन मालवी पारंपरिक लोकनृत्य ‘चुनरी रा चटके दाना चार ओ राणा’ से किया गया।

प्रस्तुति में फाल्गुनी नंदवाल, चारूल जोशी, गार्गी आचार्य, वैदेही पंड्या, प्रियांशी जोशी, सारा शर्मा, ओजस्विनी देशपांडे और समृद्धि गौरे ने भाग लिया। संगीत संयोजन पं. कुलदीप दुबे ने किया, जबकि रिदम की जिम्मेदारी पं. गौरांश शर्मा ने संभाली।

अतिथियों का सम्मान, शैफाली चतुर्वेदी ने किया मंच संचालन

सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की आईटी शाखा के प्रभारी दीपक परमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद मंदिर समिति के जनसंपर्क प्रभारी नवीन शर्मा ने अतिथियों को दुपट्टा, प्रसाद और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का संचालन शैफाली चतुर्वेदी ने किया, जबकि आभार दीपक परमार ने व्यक्त किया।

9 अक्टूबर को लोक गायन, नृत्य और रंगोली प्रतियोगिता

उमा सांझी महोत्सव के चौथे दिन, 9 अक्टूबर को भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसमें उज्जैन की प्रियंका सेन, मालव प्रेमनाट्य कला केंद्र की तृप्ति नागर के लोक गायन समूह और जयपुर की सानिका साठे के लोकनृत्य की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं।

इसी दिन दोपहर 2 बजे धार्मिक विषयों और संझा पर आधारित रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता दो वर्गों में होगी। कनिष्ठ वर्ग में कक्षा 1 से 7 तक तथा वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। प्रतिभागियों को रंगोली बनाने की सामग्री स्वयं लानी होगी।

महोत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के साथ मालवी, राजस्थानी और अन्य लोक कलाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है।

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