महाकाल की सवारी का मार्ग बना चर्चा का विषय, श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांगी स्पष्ट जानकारी
शयन आरती भक्त परिवार ने कलेक्टर को सौंपा पत्र, निर्माण कार्य के बीच सवारी मार्ग घोषित करने की मांग

उज्जैन। श्रावण और भाद्रपद मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारी को लेकर श्रद्धालुओं और भजन मंडलों में उत्सुकता बढ़ गई है। शहर में सवारी के पारंपरिक मार्ग पर विभिन्न निर्माण कार्य जारी होने के कारण इस वर्ष सवारी किस रास्ते से निकलेगी, इसे लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। इसी बीच शयन आरती भक्त परिवार ने कलेक्टर को पत्र लिखकर प्रशासन से जल्द सवारी मार्ग की आधिकारिक घोषणा करने का आग्रह किया है।
भक्त परिवार के महेंद्र कटियार ने बताया कि महाकाल की पारंपरिक सवारी जिस मार्ग से निकलती है, वहां इन दिनों सड़क चौड़ीकरण, सीसी रोड, नाली निर्माण और सीवरेज लाइन बिछाने का काम चल रहा है। कई स्थानों पर सड़कें खुदी हुई हैं, जिससे श्रद्धालुओं और भजन मंडलों को व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि सवारी मार्ग से जुड़ी कई गलियां भी निर्माण कार्य के कारण प्रभावित हैं। हर वर्ष सवारी के दौरान इन्हीं मार्गों का उपयोग भीड़ नियंत्रण और आवागमन के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि समय रहते मार्ग स्पष्ट नहीं किया गया तो तैयारियों में कठिनाई आ सकती है।
पारंपरिक भजन मंडलों की तैयारी भी प्रभावित
प्रत्येक वर्ष श्रावण-भाद्रपद की सवारी में प्रशासन द्वारा पारंपरिक नौ भजन मंडलों को शामिल होने की अनुमति दी जाती है। इसके अलावा कई अन्य धार्मिक समूह भी सवारी में शामिल होने का प्रयास करते हैं। समय पर मार्ग तय होने से भजन मंडलों, झांझ-डमरू दलों और अन्य धार्मिक समूहों को अपनी व्यवस्थाएं करने में सुविधा मिलेगी।
बड़े गणेश-हरसिद्धि मार्ग की चर्चा तेज
शहर में यह संभावना भी जताई जा रही है कि यदि पारंपरिक मार्ग निर्माण कार्य के कारण पूरी तरह तैयार नहीं हो पाता है, तो भगवान महाकाल की सवारी को बड़े गणेश मंदिर से हरसिद्धि मार्ग होते हुए शिप्रा तट तक ले जाया जा सकता है। कोरोना काल में भी इसी मार्ग से राजसी वैभव के साथ सवारी निकाली गई थी। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।



