शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार : अथर्व शर्मा

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस मनाया गया, शिक्षा को संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने पर दिया गया जोर

आजादी के बाद देश की अधिकतम समस्याओं को दूर करने के लिए शिक्षा व्यवस्था को बदलना बहुत आवश्यक है। देश के विकास के लिए शिक्षा में परिवर्तन हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार प्रमुख अथर्व शर्मा ने कही। वे सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित न्यास के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। विश्वविद्यालय परिसर में इस दिन को शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया।
समारोह की अध्यक्षता कुलसचिव अनिल शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह मनीष गोयल और कार्यपरिषद सदस्य वरुण गुप्ता उपस्थित थे। मुख्य वक्ता अथर्व शर्मा ने कहा कि शिक्षा में व्याप्त विकृतियों को दूर करने के लिए 2 जुलाई 2004 को शिक्षा बचाओ आंदोलन प्रारंभ किया गया था। यह केवल छोटी गलतियों के सुधार तक सीमित नहीं था, बल्कि देश की भाषा, धर्म, संस्कृति और महापुरुषों को अपमानित करने के षड्यंत्र को रोकने का एक सफल प्रयास था। इन्हीं सार्थक प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न न्यायालयों के 12 निर्णय न्यास के पक्ष में आए। देश की शिक्षा को संस्कृति, प्रकृति और प्रगति के अनुरूप बनाने के लिए 24 मई 2007 को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का गठन किया गया। न्यास वर्तमान में 11 विषयों, तीन आयामों और तीन कार्य विभागों के माध्यम से निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम का संचालन महानगर अध्यक्ष अविनाश राठौर ने किया। अतिथियों का परिचय मालवा प्रांत सह संयोजक डॉ नीरज सारवान ने दिया और आभार महानगर संयोजक डॉ अजय शर्मा ने माना।

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