आषाढ़ गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से, देवी साधना के लिए बन रहे हैं दुर्लभ शुभ योग
नौ दिनों तक देवी साधना, तंत्र-मंत्र आराधना और शुभ कार्यों के रहेंगे विशेष संयोग, 22 जुलाई को भड्डाली नवमी के साथ होगा समापन।
उज्जैन। इस वर्ष आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुभ संयोगों के बीच प्रारंभ हो रहे हैं। पंचांग के अनुसार इस बार गुप्त नवरात्र का आरंभ गजकेसरी योग और बुध पुष्य नक्षत्र में होगा, जिससे इन नौ दिनों का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ संयोग में देवी उपासना, तंत्र-मंत्र साधना और शुभ कार्यों की शुरुआत विशेष मानी जाती है।
ज्योतिषविद् पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार 15 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र आरंभ होंगे। इस दिन पुष्य नक्षत्र, व्रज योग, बव करण और कर्क राशि में स्थित चंद्रमा का विशेष प्रभाव रहेगा। इन ग्रह-नक्षत्रों के संयोग से गजकेसरी योग का निर्माण होगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की विशेष साधना, तंत्र-मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। इस अवधि में साधक गुप्त रूप से देवी की आराधना करते हैं और आध्यात्मिक साधनाओं में लीन रहते हैं।

वर्ष में चार नवरात्र का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र आते हैं। इनमें चैत्र और शारदीय (आश्विन) नवरात्र को प्रकट नवरात्र माना जाता है, जबकि माघ और आषाढ़ के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग का संयोग
इस बार गुप्त नवरात्र के दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग भी बनेंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इन शुभ योगों में नए कार्यों की शुरुआत, निवेश, व्यापार, शिक्षा, बैंकिंग और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ माना जाता है।
16 जुलाई को सूर्य करेंगे कर्क राशि में प्रवेश
गुप्त नवरात्र के दौरान 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार यह परिवर्तन वर्षा ऋतु को और अधिक सक्रिय बनाने वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से मानसून में तेजी आने और अच्छी वर्षा के योग बनेंगे।
22 जुलाई को होगा समापन
आषाढ़ गुप्त नवरात्र का समापन 22 जुलाई को भड्डाली नवमी के साथ होगा। यह दिन अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि इस अवधि में गुरु तारा अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य शास्त्रों के अनुसार वर्जित रहेंगे।



