उज्जैन में चतुर्दशी श्राद्ध पर उमड़ी भीड़, सिद्धनाथ घाट पर दूध चढ़ाने के लिए 1 KM लंबी कतार
गयाकोठा और सिद्धनाथ घाट पर सुबह 4 बजे से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान, पितरों की शांति के लिए श्रद्धालुओं ने किया तर्पण और पिंडदान

उज्जैन। पितृ पक्ष की चतुर्दशी पर शुक्रवार, 9 अक्टूबर को उज्जैन के गयाकोठा और सिद्धनाथ घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह तड़के 4 बजे से ही दोनों धार्मिक स्थलों पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्धकर्म किए। सिद्धनाथ घाट पर भगवान सिद्धवट को दूध अर्पित करने के लिए करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लगी रही।
गयाकोठा में पितरों के निमित्त किए श्राद्धकर्म
अंकपात क्षेत्र स्थित गयाकोठा में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई थीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का महत्व बिहार के गया तीर्थ के समान माना जाता है। यहां भगवान विष्णु और सप्त ऋषियों के चरणों से जुड़ी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृ कर्म के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं ने दूध अर्पित करने के साथ पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
सिद्धनाथ घाट पर तड़के खुले मंदिर के पट
भैरवगढ़ क्षेत्र स्थित सिद्धनाथ घाट पर भगवान सिद्धवट मंदिर के पट सुबह 4 बजे खोले गए। सबसे पहले पुजारी मंडली ने श्रद्धालुओं और उनके पूर्वजों की आत्मशांति के साथ जनकल्याण एवं सृष्टि कल्याण की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने निर्धारित पात्रों में दूध अर्पित कर भगवान सिद्धवट का दुग्ध अभिषेक किया। सुबह से ही यहां लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी और दर्शन व अभिषेक के लिए लंबी कतार लग गई।
दूध अर्पित करने के लिए दो घंटे तक करना पड़ा इंतजार
सिद्धनाथ घाट पर दुग्ध अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को करीब दो घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। दूध चढ़ाने के लिए लगी कतार लगभग एक किलोमीटर तक पहुंच गई। बड़ी संख्या में लोगों ने यहां पहुंचकर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान किया।
बताया गया कि श्रद्धालुओं के पहुंचने और दुग्ध अभिषेक का सिलसिला रात 9 बजे होने वाली शयन आरती तक जारी रहने की संभावना है।
चतुर्दशी श्राद्ध का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामान्य या विशेष परिस्थितियों में हुई हो। इसी मान्यता के चलते इस दिन गयाकोठा और सिद्धनाथ घाट सहित अन्य पितृ कर्म स्थलों पर श्रद्धालु अनुष्ठान करते हैं।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 की रात 10:15 बजे शुरू होकर 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे तक रहेगी। इसी तिथि के आधार पर शुक्रवार, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध किया जा रहा है।



