गंभीर बांध में घटा जलस्तर, 2250 एमसीएफटी क्षमता के मुकाबले सिर्फ 715 एमसीएफटी पानी बचा

मानसून की विदाई के साथ उज्जैन में जल संकट की चिंता बढ़ी, रोजाना 7 से 8 एमसीएफटी पानी की हो रही खपत

उज्जैन। मानसून की विदाई के साथ उज्जैन के सामने पेयजल संकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर की करीब सात लाख आबादी की जलापूर्ति का प्रमुख आधार गंभीर बांध इस समय अपनी कुल क्षमता के मुकाबले काफी कम पानी के साथ रह गया है। 2250 एमसीएफटी क्षमता वाले गंभीर बांध में फिलहाल करीब 715 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है।

बांध में मौजूद पानी का स्तर चिंता बढ़ाने वाला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बांध की कुल जल क्षमता का करीब 32 प्रतिशत हिस्सा ही पानी से भरा है, जबकि लगभग 68 प्रतिशत क्षमता खाली है। ऐसे में आने वाले दिनों में जल प्रबंधन नगर निगम और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

रोजाना घट रहा 7 से 8 एमसीएफटी पानी

गंभीर बांध से शहर में नियमित पेयजल आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा तापमान और मौसम की परिस्थितियों के कारण पानी का वाष्पीकरण भी होता है। इन दोनों वजहों से बांध के जल भंडार में रोजाना करीब 7 से 8 एमसीएफटी की कमी आ रही है।

यदि इसी रफ्तार से पानी कम होता रहा और पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जल संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मानसून की विदाई के साथ बढ़ी चिंता

30 सितंबर के बाद होने वाली बारिश को मौसम विभाग मानसूनोत्तर बारिश की श्रेणी में दर्ज करता है। ऐसे में नियमित मानसूनी बारिश का दौर समाप्त होने के साथ गंभीर बांध में पानी की आवक को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है।

इस बार मानसून की विदाई ऐसे समय हो रही है, जब बांध में उपलब्ध जल भंडार अपेक्षाकृत कम है। यही वजह है कि शहर की भविष्य की पेयजल जरूरतों को लेकर अभी से चिंता बढ़ने लगी है।

सात लाख आबादी की जलापूर्ति का आधार

गंभीर बांध उज्जैन शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। करीब सात लाख लोगों की प्यास बुझाने वाली इस व्यवस्था में बांध का जलस्तर कम होना सीधे तौर पर आने वाले समय की जल आपूर्ति से जुड़ा विषय है।

अब निगाहें बांध में होने वाली संभावित बारिश और पानी की आवक पर टिकी हैं। साथ ही उपलब्ध जल का इस्तेमाल किस तरह नियंत्रित और योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

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