शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा, निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ की कमी
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर, निफ्टी 23 हजार के नीचे; बैंकिंग से लेकर ऑटो और मिडकैप शेयरों में भी बिकवाली

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,000 अंक से अधिक फिसलकर 72,890 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी करीब 316 अंक टूटकर 22,824 के स्तर पर आ गया। बाजार में चौतरफा गिरावट के बीच बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में कुछ ही समय में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे वैश्विक स्तर पर बने कई दबाव बताए जा रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला है।
कारोबार शुरू होते ही बिकवाली का दबाव
सोमवार सुबह बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स में 700 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई। करीब 9:19 बजे सेंसेक्स 73,172 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 219 अंक गिरकर 22,991 के आसपास पहुंच गया।
इस दौरान बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप तेजी से घटा। शुरुआती कारोबार में यह करीब 4,81,88,998 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 4,77,59,117 करोड़ रुपये रह गया। यानी कुछ ही मिनटों में बाजार पूंजीकरण में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।
इसके बाद बिकवाली और तेज हुई और सेंसेक्स 73 हजार के नीचे चला गया। करीब 10:42 बजे सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा गिरकर 72,890 के आसपास था। निफ्टी भी 316 अंक की गिरावट के साथ 22,824 पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में
बाजार में गिरावट का असर इतना व्यापक रहा कि सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में कमजोरी दिखाई दी। बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक करीब 2 फीसदी तक नीचे रहे।
इसके अलावा बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, BEL, एमएंडएम, एलएंडटी, Eternal, ICICI बैंक और टाइटन समेत कई प्रमुख शेयरों पर भी दबाव रहा।
सुबह करीब 9:51 बजे तक टाटा स्टील को छोड़कर सेंसेक्स के लगभग सभी शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस और स्टेट बैंक प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव
बाजार की गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेज बिकवाली देखने को मिली।
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1.51 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.48 फीसदी नीचे रहा। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इंडिया VIX में भी करीब 13 फीसदी की तेजी आई और यह 14 के आसपास पहुंच गया। यह बाजार में बढ़ी अस्थिरता और निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।
बैंकिंग और ऑटो समेत कई सेक्टर दबाव में
सोमवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट रही।
- बैंक निफ्टी करीब 1.86 फीसदी नीचे
- फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.60 फीसदी की गिरावट
- ऑटो इंडेक्स 1.47 फीसदी टूटा
- FMCG में 1.34 फीसदी की कमजोरी
- निफ्टी IT करीब 1.06 फीसदी नीचे
- मीडिया इंडेक्स में 0.30 फीसदी की गिरावट
- मेटल इंडेक्स 1.27 फीसदी नीचे
- फार्मा में करीब 0.60 फीसदी की कमजोरी
- PSU बैंक इंडेक्स 2.37 फीसदी टूटा
- प्राइवेट बैंक इंडेक्स 1.63 फीसदी नीचे
- रियल्टी इंडेक्स 1.87 फीसदी फिसला
- ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1.19 फीसदी कमजोर
- निफ्टी सीमेंट 1.43 फीसदी नीचे
- निफ्टी केमिकल्स में करीब 1.36 फीसदी की गिरावट
NSE पर भी गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़ी हुई रही। एक समय करीब 2,100 से ज्यादा शेयर लाल निशान में थे, जबकि बढ़त वाले शेयरों की संख्या काफी कम रही।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ाई है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम और अमेरिका के साथ तनाव के बीच तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।
ब्रेंट क्रूड करीब 1.27 फीसदी बढ़कर 105.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 0.76 फीसदी की बढ़त के साथ 93.11 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार तेजी का असर घरेलू अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
ईरान-अमेरिका तनाव का भी असर
बाजार की धारणा पर भू-राजनीतिक तनाव का असर भी दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज किए जाने की खबरों के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे निवेशकों के बीच वैश्विक बाजारों को लेकर चिंता बढ़ी।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।
पिछले कारोबारी सत्र में हुई थी रिकवरी
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में सुधार देखने को मिला था। सेंसेक्स 315 अंक यानी करीब 0.43 फीसदी की बढ़त के साथ 73,895 के स्तर पर बंद हुआ था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 बढ़त में और 11 गिरावट में बंद हुए थे।
निफ्टी 50 भी करीब 77 अंक चढ़कर 23,140 के स्तर पर बंद हुआ था। इसके 50 शेयरों में 34 बढ़त में, 15 गिरावट में और एक शेयर बिना बदलाव के बंद हुआ।
हालांकि सोमवार के कारोबार में वैश्विक संकेतों के चलते शुक्रवार की रिकवरी पर दबाव दिखाई दिया।
विदेशी बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत
एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। जापान के निक्केई में शुरुआती कारोबार के बाद तेजी रही, जबकि दक्षिण कोरिया के KOSPI पर चिप शेयरों में कमजोरी का असर दिखा।
उधर अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स में भी कमजोरी रही। डॉऊ फ्यूचर्स 160 अंक से अधिक नीचे थे, जबकि S&P 500 और Nasdaq फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजारों में कुल मिलाकर सुधार रहा था। डॉऊ जोन्स करीब 0.3 फीसदी ऊपर बंद हुआ था, जबकि S&P 500 और Nasdaq ने भी साप्ताहिक आधार पर बढ़त दर्ज की थी।
सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अहम स्तर
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता के मुताबिक सेंसेक्स फिलहाल साइडवेज से मंदी वाले रुझान में है। उनके अनुसार 73,200 से 73,450 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। वहीं 74,000 के ऊपर टिकाऊ खरीदारी होने पर 74,200 से 74,500 का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है।
निफ्टी को लेकर एलकेपी सिक्योरिटिज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रुपक डे ने 23,000 को अहम सपोर्ट बताया है। इसके नीचे 22,700 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं ऊपर की तरफ 23,200 से 23,300 का क्षेत्र महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है।
इन तकनीकी स्तरों के आधार पर आने वाले कारोबार में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर रह सकती है।



