राधा अष्टमी कल: 49 मिनट रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि और भोग
19 सितंबर को मनाया जाएगा राधा रानी का जन्मोत्सव, उदयातिथि के अनुसार रखा जाएगा व्रत; राधा-कृष्ण की पूजा के साथ माखन और खीर का लगाएं भोग

उज्जैन। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन राधा-कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त व्रत रखने के साथ राधा रानी को प्रिय वस्तुएं अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस वर्ष राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर में शुरू होकर 19 सितंबर को दोपहर बाद समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार 19 सितंबर को राधा अष्टमी का व्रत और पूजन किया जाएगा।
49 मिनट का रहेगा पूजा का शुभ समय
राधा अष्टमी पर पूजा के लिए 49 मिनट का शुभ मुहूर्त बताया गया है। यह समय दोपहर 11:50 बजे से 12:39 बजे तक रहेगा।
भक्त इस अवधि में राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है।
ऐसे करें राधा अष्टमी पर पूजा
राधा अष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल को साफ करने के बाद राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा की सरल विधि इस प्रकार है—
- सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
- राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण को तिलक लगाएं।
- इसके बाद फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
- राधा रानी और श्रीकृष्ण के नाम या मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- पूजा के दौरान राधा रानी को माखन, मिश्री और खीर का भोग लगाया जा सकता है।
- अपनी परंपरा के अनुसार अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित करें।
- अंत में राधा-कृष्ण की आरती कर पूजा पूर्ण करें।
राधा रानी को क्या भोग लगाएं?
राधा अष्टमी पर घर में तैयार किया गया सात्विक प्रसाद भगवान को अर्पित किया जा सकता है। राधा-कृष्ण को माखन-मिश्री, खीर, फल और मिठाई का भोग लगाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जा सकता है।
क्यों खास है राधा अष्टमी?
राधा अष्टमी को राधा रानी के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। ब्रज क्षेत्र सहित देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर मंदिरों में विशेष श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। भक्त राधा रानी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक राधा-कृष्ण का स्मरण और पूजन करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।



