जन्माष्टमी से पहले सज रहा सांदीपनि आश्रम, कृष्ण-बलराम और सुदामा के लिए तैयार हो रहे खास वस्त्र
4 सितंबर को विशेष जन्मोत्सव की तैयारी, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए भी एक जैसी थीम में तैयार हो रहे परिधान

उज्जैन, 2 सितंबर 2026। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन का सांदीपनि आश्रम जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से सजाया जा रहा है। 4 सितंबर को होने वाले जन्मोत्सव को लेकर आश्रम में पूजा-अर्चना और भगवान के श्रृंगार की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए एक जैसी थीम में नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं।
चार महीने पहले शुरू हुई तैयारी
जन्माष्टमी पर भगवान के वस्त्र तैयार करने की प्रक्रिया आश्रम में काफी पहले शुरू कर दी जाती है। करीब चार महीने पहले कपड़े के प्रकार, रंग और सजावट को लेकर निर्णय लिया जाता है। इस बार मखमली कपड़ों का चयन किया गया है, जिन पर रेशमी और जड़ाऊ धागों के साथ मोतियों से आकर्षक कारीगरी की जा रही है।
सांदीपनि आश्रम की पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास के अनुसार, वस्त्रों और सजावट के लिए आवश्यक सामग्री अलग-अलग शहरों से मंगाई जाती है। सूरत, जयपुर और कोलकाता से कपड़े, मोती और कारीगरी का सामान मंगवाया गया है।
कृष्ण से गुरु परिवार तक एक रंग की थीम
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के साथ बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के वस्त्रों में एकरूपता देखने को मिलेगी। सभी के लिए नीले रंग के परिधान तैयार किए जा रहे हैं। इन पर बारीक कढ़ाई, रेशमी धागों और मोतियों से सजावट की जा रही है।
वस्त्रों के साथ मुकुट, हार और अन्य श्रृंगार सामग्री भी तैयार की जा रही है। आश्रम प्रबंधन का लक्ष्य 3 सितंबर तक सभी तैयारियां पूरी करने का है, ताकि जन्माष्टमी के दिन विशेष श्रृंगार विधिवत किया जा सके।
लड्डू गोपाल के लिए अलग पोशाक
पालने में विराजमान होने वाले लड्डू गोपाल के लिए इस बार सफेद और गुलाबी रंग की पोशाक तैयार की जा रही है। मोतियों की कारीगरी से सजी यह पोशाक जन्माष्टमी की रात विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
उज्जैन में कृष्ण जन्मोत्सव का विशेष महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। मान्यता है कि उन्होंने यहां 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। इसी धार्मिक और पौराणिक महत्व के कारण जन्माष्टमी पर सांदीपनि आश्रम में होने वाले आयोजन को विशेष महत्व दिया जाता है।



