MP में 23 सितंबर को ‘नो-UPI डे’, ₹2 हजार से ज्यादा के भुगतान पर व्यापारी जताएंगे विरोध
UPI पर प्रस्तावित MDR के खिलाफ व्यापारिक संगठनों का अभियान; स्कैनर पर काला कपड़ा डालकर सांकेतिक प्रदर्शन की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में 23 सितंबर को व्यापारी संगठन ‘नो-UPI डे’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारियों ने ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान को लेकर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर चिंता जताई है। इसके विरोध में प्रदेश के कई बाजारों में कुछ समय के लिए UPI QR स्कैनर को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया है।
नए प्रावधान के तहत 15 अक्टूबर 2026 से पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। यह शुल्क व्यापारी पक्ष पर लागू किया जाना है, ग्राहक से सीधे वसूलने का प्रावधान नहीं है।
थोक बाजार में बड़े लेन-देन ज्यादा, व्यापारियों की चिंता बढ़ी
भोपाल के थोक किराना कारोबार में बड़ी राशि के डिजिटल भुगतान आम हैं। व्यापारियों का कहना है कि किराना, सराफा, ऑटोमोबाइल और दूसरे कारोबारों में एक ही बिल की राशि अक्सर ₹2,000 से अधिक होती है। ऐसे में MDR लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने की चिंता व्यापारियों के बीच है।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल के अनुसार, भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर जैसे प्रमुख शहरों के थोक बाजारों में बड़ी संख्या में लेन-देन ₹2,000 से ऊपर के होते हैं। संगठन का कहना है कि इसी वजह से 23 सितंबर को सांकेतिक विरोध का आह्वान किया गया है।
‘स्कैनर पर काला कपड़ा डालकर जताएंगे विरोध’
व्यापारी संगठनों की ओर से बाजारों में कुछ समय के लिए UPI QR स्कैनर को काले कपड़े से ढकने की अपील की गई है। इसे नए MDR ढांचे के खिलाफ सांकेतिक विरोध बताया गया है।
व्यापारियों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब बड़े UPI लेन-देन पर MDR लागू होने से उनके कारोबार की लागत प्रभावित हो सकती है। हालांकि, नए नियम के अनुसार यह शुल्क ग्राहकों पर डालने के बजाय व्यापारी पक्ष पर लागू किया जाना है।
किराना कारोबारियों को मार्जिन घटने की चिंता
थोक किराना कारोबारियों का कहना है कि कई वस्तुओं में मुनाफे का मार्जिन पहले से सीमित है। ऐसे में ₹10 हजार के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से ₹40 का शुल्क बनता है। वहीं ₹75 हजार के भुगतान पर यह राशि ₹300 तक पहुंच सकती है।
कारोबारियों के मुताबिक, रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान होने पर कुल लागत बढ़ सकती है। इसी वजह से व्यापारिक संगठन MDR को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
सराफा कारोबार में भी बड़े UPI भुगतान
सराफा कारोबारियों का कहना है कि आभूषणों की खरीदारी में सामान्य तौर पर भुगतान राशि अधिक होती है। ऐसे कारोबार में ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान की संख्या ज्यादा होने के कारण MDR का प्रभाव व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऑटोमोबाइल कारोबार में भी चिंता
कार और अन्य वाहनों की बुकिंग में भुगतान राशि आमतौर पर ₹2,000 से काफी अधिक होती है। ऐसे में ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि नई MDR व्यवस्था का असर बड़ी राशि वाले डिजिटल लेन-देन पर दिखाई देगा।
हालांकि, नियम सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं है। Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर शुल्क नहीं लगाया गया है, जबकि कुछ विशेष श्रेणियों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था निर्धारित की गई है।
भोपाल चैंबर ने की जीरो-MDR की मांग
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारी UPI लेन-देन पर MDR को लेकर आपत्ति जताई है। चैंबर की ओर से केंद्र और राज्य स्तर के संबंधित पदाधिकारियों को पत्र भेजकर जीरो-MDR व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनका आग्रह है कि UPI भुगतान पर अतिरिक्त लागत से कारोबारियों पर दबाव न बढ़ाया जाए।



