सिंहस्थ-2028 से बदलेगी उज्जैन की तस्वीर, 37 पुलों और 350 किमी सड़क नेटवर्क से मिलेगी नई रफ्तार

22 नए पुलों का निर्माण जारी, 853 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से ट्रैफिक जाम होगा कम और शहर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन शहर व्यापक आधारभूत संरचना विकास के दौर से गुजर रहा है। आगामी दो वर्षों में शहर का परिवहन नेटवर्क पूरी तरह बदलने जा रहा है। वर्तमान में 15 पुलों वाले उज्जैन में सिंहस्थ से पहले 22 नए पुलों का निर्माण पूरा होने के बाद कुल संख्या 37 हो जाएगी। इसके साथ ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 350 किलोमीटर सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य भी तेजी से जारी है।

प्रशासन का उद्देश्य केवल सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए आधुनिक और मजबूत यातायात व्यवस्था विकसित करना है। रेलवे ओवरब्रिज, रिवर ओवरब्रिज, लिंक ब्रिज और चौड़ी सड़कों का यह नेटवर्क उज्जैन की ट्रैफिक व्यवस्था को नई दिशा देगा।

शिप्रा पर बनेंगे 22 नए पुल

सिंहस्थ की तैयारियों के तहत शिप्रा नदी पर 22 नए पुल प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं पर लगभग 853 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पुलों के निर्माण से शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा और श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों को भी तेज एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

रेलवे लाइन और नदी से बनी दूरी होगी कम

उज्जैन में लंबे समय से रेलवे लाइन और शिप्रा नदी के कारण कई क्षेत्रों के बीच आवागमन प्रभावित होता रहा है। कई स्थानों पर लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि त्योहारों और मेलों के दौरान यातायात जाम की समस्या बढ़ जाती है। नए रेलवे ओवरब्रिज, नदी पुल और लिंक ब्रिज इन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगे।

रोजमर्रा के आवागमन को भी मिलेगा लाभ

इन परियोजनाओं का लाभ केवल सिंहस्थ तक सीमित नहीं रहेगा। हरिफाटक सहित कई क्षेत्रों में रेलवे फाटक के कारण लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। महाकाल मंदिर, शिप्रा घाट, औद्योगिक क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों और शहर के प्रमुख मार्गों के बीच यात्रा समय कम होगा। इससे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी तेज हो सकेगी।

समयबद्ध तरीके से पूरे होंगे सभी प्रोजेक्ट

प्रशासन ने सड़क और पुल निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं की विभागवार समीक्षा कर समय-सीमा तय की है। कई परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि कुछ कार्य निविदा और तकनीकी स्वीकृति के अंतिम चरण में हैं। जिन परियोजनाओं में प्रशासनिक अड़चनें हैं, उन्हें जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सिंहस्थ से पहले पूरा कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार किया जा सके।

देश के लिए बन सकता है उदाहरण

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजन को केंद्र में रखकर किसी मध्यम आकार के शहर में इतने बड़े पैमाने पर स्थायी सड़क और पुल नेटवर्क विकसित करना देश में दुर्लभ उदाहरण है। निर्धारित समय में परियोजनाएं पूरी होने पर उज्जैन भविष्य के बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button