महाकाल की श्रावण-भादौ सवारी 2026 को मिलेगी नई पहचान, हर सोमवार अलग थीम से सजेगा नगर भ्रमण
वैदिक संस्कृति, लोक कला, पर्यावरण, 84 महादेव और सिंहस्थ-2028 की झलक बनेगी आकर्षण का केंद्र, अंतिम राजसी सवारी में ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 की श्रावण-भादौ सवारियों को श्रद्धा के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संदेशों से जोड़ने की विशेष तैयारी की है। इस वर्ष भगवान महाकाल की प्रत्येक सवारी अलग-अलग थीम पर आधारित होगी, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक जागरूकता का संदेश भी मिलेगा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रावण और भादौ मास में निकलने वाली सभी सवारियों को पहले से अधिक व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। प्रत्येक सोमवार की सवारी के लिए अलग थीम निर्धारित की गई है, वहीं मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले जनजातीय नृत्य दल हर सवारी में अपनी रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे।
मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि सभी सवारियों के सफल संचालन के लिए प्रभारी और सहायक अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। सुरक्षा, यातायात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और व्यवस्थाओं को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
इस वर्ष की सवारियों की थीम
- 3 अगस्त – वैदिक उद्बोधन
- 10 अगस्त – लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- 17 अगस्त – पुलिस, सेना, होमगार्ड तथा विद्यालयीन एवं निजी बैंड की प्रस्तुति
- 24 अगस्त – पर्यावरण संरक्षण जागरूकता
- 31 अगस्त – 84 महादेव की झांकियां
- 7 सितम्बर (राजसी सवारी) – सिंहस्थ-2028 की विशेष झांकी एवं ड्रोन से पुष्पवर्षा
राजसी सवारी में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही ड्रोन के माध्यम से पुष्पवर्षा श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण रहेगी।
मंदिर समिति का उद्देश्य इस बार की सवारियों को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए उन्हें सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों से भी जोड़ना है।



