प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर उज्जैन में मंथन, आमजन की सुविधा और भौगोलिक परिस्थितियों पर रहेगा फोकस
प्रशासनिक इकाइयों के गठन-पुनर्गठन पर आयोग की बैठक, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से सुझाव लेने पर जोर

उज्जैन, 23 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की बैठक बुधवार को प्रशासनिक संकुल भवन के सभागार में आयोजित हुई। आयोग अध्यक्ष एवं पूर्व एसीएस एस.एन. मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर जिले की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, क्षेत्रफल, प्रशासनिक जरूरतों और आमजन की अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी हो, जिससे लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए कम दूरी तय करनी पड़े और योजनाओं का लाभ आसानी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर हो प्रशासनिक पुनर्गठन
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि प्रशासनिक पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरल, सुलभ और जनोन्मुखी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी प्रशासनिक इकाई के गठन या पुनर्गठन से पहले स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को समझना जरूरी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि संभाग, जिला, तहसील और जनपद विकासखंड से जुड़े पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण अथवा विलोपन के प्रस्ताव आवश्यक तथ्यों और कारणों के साथ निर्धारित प्रपत्र में कलेक्टर के माध्यम से आयोग को भेजे जाएं। साथ ही प्रस्ताव तैयार करने से पहले जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी चर्चा करने पर जोर दिया गया।
जनसंख्या के साथ दूरी और संसाधनों को भी माना जाएगा आधार
बैठक में प्रशासनिक इकाइयों के आकार, काम के बोझ और जिम्मेदारियों के अनुसार पद संरचना तय करने पर भी चर्चा हुई। आयोग ने मानव संसाधन के बेहतर उपयोग और विभिन्न पदों के लिए जरूरी कौशल एवं दक्षता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
पुनर्गठन की प्रक्रिया में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण माना गया। तहसील और जनपद की सीमाएं तय करते समय यह देखा जाएगा कि अधिक से अधिक लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।
आयोग की ओर से बताया गया कि नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए तैयार किए गए मार्गदर्शी सिद्धांतों में जनसंख्या संतुलन, भौगोलिक दूरी, प्राकृतिक सीमाएं और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। किसी क्षेत्र के पुनर्गठन का प्रस्ताव होने पर संबंधित गांव या तहसील की भौगोलिक स्थिति और नजदीकी जिले से उसकी दूरी जैसी जानकारी भी देखी जाएगी।
उज्जैन की भौगोलिक स्थिति और सिंहस्थ-2028 पर भी चर्चा
बैठक की शुरुआत में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने उज्जैन जिले की भौगोलिक संरचना, जनसंख्या, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी आयोग को दी। उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही और सिंहस्थ-2028 के संदर्भ में जिले की प्रशासनिक आवश्यकताओं की जानकारी भी साझा की।
कलेक्टर ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर के कारण उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसके चलते पर्यटन और उससे जुड़ी गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि जिले की स्थानीय जरूरतों, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति तथा आमजन की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर आयोग को आवश्यक जानकारी और प्रस्ताव उपलब्ध कराए जाएंगे।
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच पर जोर
आयोग के सचिव अक्षय कुमार सिंह ने आयोग की कार्यप्रणाली और पुनर्गठन की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग प्रदेश के अलग-अलग संभागों और जिलों का दौरा कर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सुझाव एकत्र कर रहा है।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने शासकीय सेवकों से पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा जताई।
आयोग सदस्य मुकेश शुक्ला ने पोर्टल पर उपलब्ध प्रश्नावली और प्रशासनिक पुनर्गठन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी। इनमें प्रशासनिक पदों की आवश्यकता, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सीमाएं, आवागमन, आधारभूत सुविधाएं, आर्थिक गतिविधियां, संसाधन, जनसंख्या घनत्व, सामाजिक संरचना और कानून-व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं।
आम नागरिक और संस्थाएं भी दे सकेंगे सुझाव
बैठक में बताया गया कि प्रशासनिक इकाइयों के गठन, पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण या विलोपन से जुड़े सुझाव देने के लिए आयोग की प्रश्नावली वेब पोर्टल पर उपलब्ध है। आम नागरिक, संस्थाएं, समितियां और जनप्रतिनिधि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने सुझाव भेज सकते हैं।
प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों की निर्धारित मापदंडों के आधार पर समीक्षा किए जाने के बाद आयोग अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगा।
बैठक में प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं, मुख्यालय, आयोग के कार्यक्षेत्र और कलेक्टरों से अपेक्षित जानकारी सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने अपने सेवाकाल के अनुभवों के आधार पर भी प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर सुझाव दिए।
बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, सीईओ जिला पंचायत श्रेयांश कुमाट, उज्जैन स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन, एएसपी आलोक शर्मा, एडीएम अतेंद्र सिंह गुर्जर, अपर कलेक्टर शाश्वत शर्मा सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। विकासखंड स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।



