उज्जैन पहुंचे उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, बोले- संस्कृत विद्यार्थियों को मिलें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का किया शैक्षणिक भ्रमण, AI आधारित पुस्तकालय के लिए ₹1.25 लाख की सहायता

उज्जैन, 19 सितंबर। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने शुक्रवार को उज्जैन स्थित महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वैदिक परंपरा के अनुरूप मंत्रोच्चार और कलश दर्शन के साथ राज्यपाल का स्वागत किया गया।

इस दौरान राज्यपाल ने संस्कृत शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर तैयार किए जाने चाहिए। उनके अनुसार संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

AI से आधुनिक बनेगा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के आधुनिकीकरण के लिए ₹1.25 लाख की सहायता प्रदान की। उन्होंने पुस्तकालय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अध्ययन सामग्री तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में संरक्षित पांडुलिपियों को भी देखा और इनके संरक्षण तथा अध्ययन की आवश्यकता पर चर्चा की।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों से संवाद

अपने संबोधन में राज्यपाल ने बताया कि वे स्वयं सप्तशती का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने वेदों और गुरुग्रंथ साहिब से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की अलग-अलग धाराओं को समझने की जरूरत बताई।

उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन को लगातार जारी रखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में संस्कृत की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसके लिए अध्ययन के साथ शोध को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

विद्यार्थियों के बीच गाया ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ प्रसंग

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों के साथ संवाद को सहज बनाने के लिए ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ प्रसंग गाकर भी सुनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रति निरंतर सीखने और आगे बढ़ने का संदेश दिया।

इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों से ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष कराया। उनके आह्वान पर विश्वविद्यालय परिसर जयघोष से गूंज उठा।

रुद्राक्ष का पौधा लगाया, विद्वानों का सम्मान

विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र को केदारनाथ का चिन्ह भेंट किया।

कार्यक्रम में संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध के क्षेत्र में योगदान देने वाले पांच विद्वानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित लोगों में डॉ. रामचंद्र ठाकुर, अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर; डॉ. बालकृष्ण शर्मा, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन तथा पद्मश्री भगवती लाल पुरोहित सहित पांच विद्वान शामिल रहे।

आधुनिक तकनीक के साथ ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसके आधुनिक उपयोग में विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्कृत, प्राचीन पांडुलिपियों और भारतीय ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. तुलसीदास परोहा ने किया। समापन पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलीप सोनी ने आभार व्यक्त किया। राज्यपाल के भ्रमण के दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी मौजूद रहे।

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