युवा धर्म संसद में CM मोहन यादव बोले- युवाओं को भगवान राम के चरित्र और कृष्ण-सुदामा की मित्रता से सीखना चाहिए
उज्जैन में तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का समापन, मुख्यमंत्री ने राम के संघर्ष और कृष्ण-सुदामा के मित्रता प्रसंग का किया उल्लेख

उज्जैन, 19 सितंबर। उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं के जीवन में भारतीय परंपरा और पौराणिक प्रसंगों से मिलने वाली सीख पर बात की। 17 से 19 सितंबर तक गीता भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से युवा, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य शामिल हुए।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जीवन और उनके संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि युवाओं को उनके चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने ऋषि विश्वामित्र और राम-लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय युवा शक्ति पर भरोसा किया गया और राम-लक्ष्मण ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
संघर्ष के बीच सफलता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में उपलब्धियां चुनौतियों से गुजरने के बाद हासिल होती हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, सीता हरण और रावण के साथ संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखना जरूरी है।
डॉ. यादव ने युवाओं से राम के जीवन से संघर्ष, जिम्मेदारी और दृढ़ता जैसे पहलुओं को समझने की बात कही। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बीच आगे बढ़ने की क्षमता ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करती है।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का भी उल्लेख किया। राधा अष्टमी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में राधा-कृष्ण का संबंध विशेष स्थान रखता है।
युवाओं के बीच मित्रता की चर्चा करते हुए उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग का उदाहरण दिया। उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम को इस प्रसंग से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि मित्र के कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना और सहायता करते समय उसके सम्मान का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, सांदीपनि आश्रम को भगवान कृष्ण और सुदामा की शिक्षा से जोड़ा जाता है।
ध्रुपद-द्रोणाचार्य प्रसंग का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने महाभारत के ध्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग का उल्लेख करते हुए मित्रता और सम्मान के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि संबंधों में सम्मान की कमी आगे चलकर विवाद का कारण बन सकती है।
अपने संबोधन में उन्होंने शासन व्यवस्था से जुड़े उदाहरण भी रखे और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तथा जनधन खातों का उल्लेख किया। यह हिस्सा मुख्यमंत्री के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा था।
तीन दिन चला युवा धर्म संसद का आयोजन
उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित युवा धर्म संसद के दौरान धर्म, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, चरित्र निर्माण और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र हुए। आयोजन की पूर्व जानकारी के अनुसार इसमें 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1600 से अधिक युवा प्रतिभागियों के शामिल होने की बात कही गई थी।
समापन कार्यक्रम में आचार्य मिथिलेशनंदनी शरण जी महाराज ने भी संबोधन दिया। उन्होंने भगवान श्रीराम के चरित्र में कृतज्ञता को महत्वपूर्ण गुण बताते हुए युवाओं को भारतीय परंपरा से जुड़े मूल्यों को समझने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, मप्र गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।



