मध्य प्रदेश में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी, उज्जैन के अधीन आएंगे 25 जिलों के मेडिकल कॉलेज
सरकार ने तैयार किया नया ड्राफ्ट, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज उज्जैन यूनिवर्सिटी से होंगे संबद्ध

उज्जैन। मध्य प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन करते हुए इसे दो भागों में विभाजित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग के मेडिकल कॉलेज उज्जैन स्थित नई मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन संचालित होंगे।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने इस संबंध में प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मेडिकल कॉलेजों के प्रशासनिक, शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी कार्यों में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। इसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा के संचालन को अधिक सुगम और क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी बनाना है।
भौगोलिक आधार पर होगा विभाजन
प्रस्तावित ड्राफ्ट में पूरे प्रदेश को भौगोलिक आधार पर दो मेडिकल विश्वविद्यालयों के बीच विभाजित किया गया है। प्रारंभिक योजना में जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में तीन अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से अलग विश्वविद्यालय की मांग सामने आने के बाद सरकार ने संशोधित प्रस्ताव तैयार किया। अब प्रदेश में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की तैयारी है।
उज्जैन यूनिवर्सिटी के दायरे में आएंगे 25 जिले
प्रस्ताव के अनुसार उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत मालवा-निमाड़, भोपाल, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल अंचल के मेडिकल कॉलेज शामिल किए जाएंगे। इनमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर, भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर और गुना जैसे जिलों के मेडिकल कॉलेज शामिल होने की संभावना है।
प्रशासनिक व्यवस्था होगी अधिक सुदृढ़
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन होने से संबद्ध कॉलेजों के शैक्षणिक कार्य, परीक्षा संचालन, शोध गतिविधियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बेहतर होने से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है।
नोट: यह प्रस्ताव सरकार के तैयार किए गए ड्राफ्ट पर आधारित है। अंतिम स्वरूप आधिकारिक अधिसूचना या मंजूरी के बाद ही लागू होगा।



