मध्य प्रदेश UCC बिल: विवाह, लिव-इन और संपत्ति के नियमों में होंगे बड़े बदलाव, बेटा-बेटी को मिलेगा समान अधिकार

समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित प्रावधानों में विवाह पंजीयन अनिवार्य, लिव-इन के लिए भी नियम तय; बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार

भोपाल।

मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष इसके कई प्रावधानों और विधेयक पेश करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

UCC बिल में प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान

अनुसूचित जनजातियां रहेंगी दायरे से बाहर

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार अनुसूचित जनजातियों (ST), संरक्षित पारंपरिक समुदायों तथा कुछ घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों पर UCC लागू नहीं होगा।

एक समय में केवल एक विवाह मान्य

सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक वैध विवाह की व्यवस्था प्रस्तावित है। पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य

विधेयक में विवाह और तलाक दोनों का सरकारी पंजीयन अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। मौखिक तलाक या किसी अनौपचारिक पंचायत के फैसले को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।

बेटा और बेटी को समान उत्तराधिकार

प्रस्तावित कानून के अनुसार बेटा और बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। उनकी वैवाहिक स्थिति उत्तराधिकार के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी। माता और पिता को भी प्रथम श्रेणी का उत्तराधिकारी माना गया है।

सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा

विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या सहायक प्रजनन तकनीक (ART) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव रखा गया है।

हत्या के दोषी को नहीं मिलेगा उत्तराधिकार

यदि कोई व्यक्ति हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी ठहराया जाता है तो वह संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार खो सकता है। वैध उत्तराधिकारी नहीं होने की स्थिति में संपत्ति राज्य के अधीन जा सकती है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी नियम

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीयन कराना होगा। दोनों की आयु कम से कम 18 वर्ष होना आवश्यक होगी तथा वे पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए।

नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रस्ताव

बिना पंजीयन निर्धारित अवधि से अधिक लिव-इन में रहने, गलत जानकारी देने या सूचना छिपाने की स्थिति में जुर्माना और कारावास का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यदि कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में पाया जाता है तो उसके लिए अधिक कठोर दंड का भी प्रस्ताव रखा गया है।

विधानसभा में विपक्ष का विरोध

विधेयक पेश किए जाने के बाद कांग्रेस ने विधानसभा के भीतर और बाहर विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का आरोप है कि बिल को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप प्रस्तुत नहीं किया गया। वहीं सरकार का कहना है कि यह कानून महिलाओं, बच्चों और परिवारों के अधिकारों को मजबूत करेगा तथा सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

नोट: यह जानकारी विधानसभा में प्रस्तुत प्रस्तावित UCC विधेयक के उपलब्ध प्रावधानों पर आधारित है। अंतिम कानूनी स्थिति विधेयक पारित होने और अधिसूचना जारी होने के बाद ही लागू होगी।

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