मूंग खरीदी की सीमा 60 प्रतिशत हुई, भोपाल में जारी किसान आंदोलन समाप्त
सरकार ने स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की तारीख बढ़ाई; खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित, समीक्षा के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति

भोपाल। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी और खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को लेकर राजधानी में जारी किसान आंदोलन बुधवार रात समाप्त हो गया। मंत्रालय में सरकार के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के बीच हुई चर्चा के बाद प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद किसान नेताओं ने धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।
सरकार ने पात्र किसानों से मूंग उपज की खरीदी सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। पहले अपनी 25 प्रतिशत उपज बेच चुके पात्र किसान भी निर्धारित नियमों के तहत कुल 60 प्रतिशत तक मूंग बेच सकेंगे। इस फैसले का अधिक लाभ नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों के किसानों को मिलने की संभावना है।
स्लॉट बुकिंग और खरीदी की समय-सीमा बढ़ी
किसानों को उपज बेचने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है। मूंग उपार्जन की अंतिम तारीख भी 10 अगस्त के स्थान पर अब 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि समय-सीमा बढ़ने से उन किसानों को अवसर मिलेगा, जो अब तक स्लॉट बुक नहीं कर पाए थे।
खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था स्थगित
खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन प्रणाली को फिलहाल स्थगित करने पर भी सहमति बनी है। नई व्यवस्था की समीक्षा के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति किसानों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं का अध्ययन कर सरकार को सुझाव देगी। समीक्षा पूरी होने तक खाद वितरण की पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
किसानों का कहना था कि ऑनलाइन ई-टोकन प्रक्रिया में तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियां सामने आ रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट तथा डिजिटल संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण कई किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही थी। आंदोलन के दौरान किसान इस प्रणाली को वापस लेने या इसमें व्यापक सुधार करने की मांग कर रहे थे।
दिनभर चला प्रदर्शन, शाम को हुई निर्णायक चर्चा
बुधवार को आंदोलनकारी किसानों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर गतिरोध बना रहा। प्रदर्शनकारियों ने मूंग की अधिक मात्रा में खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था के विरोध में नारेबाजी की। कुछ किसानों ने सड़क पर हवन और हनुमान चालीसा का पाठ कर सरकार से मांगें स्वीकार करने की अपील की।
शाम को किसान शहर की ओर आगे बढ़े तो प्रशासन ने उनसे वार्ता शुरू की। इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल को मंत्रालय ले जाया गया, जहां मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई। लंबी चर्चा के बाद मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने, समय-सीमा में विस्तार और ई-टोकन व्यवस्था स्थगित करने का निर्णय सामने आया।
किसान नेताओं ने बताया आंदोलन की सफलता
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने आंदोलन समाप्त होने की पुष्टि की। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ ने सरकार के निर्णय को किसानों के संघर्ष का परिणाम बताया। संगठनों ने कहा कि घोषित फैसलों का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
केंद्र की स्वीकृति का भी उठा मुद्दा
आंदोलन के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र भी चर्चा में रहा। इसमें कहा गया कि मूल्य समर्थन योजना के तहत विभिन्न राज्यों के लिए स्वीकृत कुल मूंग खरीदी में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सर्वाधिक है। उन्होंने राज्य सरकार से उपलब्ध स्वीकृति के अनुसार उपार्जन की प्रक्रिया तेजी से पूरी कराने को कहा था।
सरकार के नए फैसलों के बाद किसान राजधानी से लौटने लगे। अब किसानों की नजर मूंग उपार्जन की जमीनी व्यवस्था, भुगतान की गति और खाद वितरण प्रणाली की समीक्षा पर रहेगी।



