भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना है तो सांदीपनि आश्रम आएं: मुख्यमंत्री मोहन यादव

गुरु पूर्णिमा पर ‘गुरु परंपरा का लोकपर्व श्रद्धा समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री; तीन पुस्तकों का विमोचन कर वेदपाठियों को बांटीं श्रीमद भगवद गीता

उज्जैन, 29 जुलाई। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महर्षि सांदीपनि आश्रम में आयोजित ‘गुरु परंपरा का लोकपर्व श्रद्धा समारोह’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा, गुरुकुल व्यवस्था और ज्ञान परंपरा को गहराई से समझने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उज्जैन के सांदीपनि आश्रम अवश्य आना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन की पहचान केवल धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में भी रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और उनके सखा सुदामा ने इसी स्थान पर महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी। गुरु सांदीपनि से मिली शिक्षा ने श्रीकृष्ण को विश्व के लिए मार्गदर्शक और जगद्गुरु बनाया।

गुरु को भारतीय परंपरा में मिला सर्वोच्च स्थान

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को अत्यंत ऊंचा स्थान दिया गया है। उज्जैन वह पुण्यभूमि है, जहां स्वयं भगवान भी शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे थे। सांदीपनि आश्रम आज भी गुरु-शिष्य परंपरा और प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की जीवंत स्मृति है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में भी उज्जैन के साहित्य, कला, संस्कृति और धार्मिक महत्व को केंद्र में रखकर विकास योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने उज्जैन के विकास में सभी धर्मों और समाजों के सहयोग की सराहना करते हुए प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

महर्षि सांदीपनि की पूजा कर मंदिरों में किए दर्शन

कार्यक्रम स्थल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सबसे पहले महर्षि सांदीपनि की पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद उन्होंने आश्रम परिसर स्थित प्राचीन कुंडेश्वर महादेव और सर्वेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

आश्रम परिसर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय ज्ञान व्यवस्था के महत्व पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां भी दी गईं।

तीन पुस्तकों का किया विमोचन

मुख्यमंत्री ने समारोह में ‘महर्षि गुरु सांदीपनि’, ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ और ‘सर्वांग’ पुस्तक का विमोचन किया। इनमें ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ मुख्यमंत्री द्वारा लिखित पुस्तक है।

इसके साथ ही उन्होंने वेदपाठियों को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां वितरित कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक ग्रंथ केवल पूजा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन प्रबंधन, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं।

सांदीपनि लोक और काल भैरव लोक की योजना

विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उज्जैन को लगातार विकास योजनाओं की सौगात मिल रही है। उन्होंने बताया कि शहर में सांदीपनि लोक और काल भैरव लोक विकसित करने की योजना है। उज्जैन में आयुर्वेद चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी।

भक्ति गायन और नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समां

समारोह का आयोजन मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और त्रिवेणी संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में भक्ति गायन के साथ ‘गुरु दत्तात्रेय की पाठशाला’ नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसमें गुरु परंपरा और शिक्षा के संस्कारों को मंच पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी, नगर भाजपा अध्यक्ष संजय अग्रवाल, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वेदपाठी, पुजारी परिवार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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