
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, जानिए उनका राजनीतिक सफर
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर तत्काल प्रभाव से सौंपी जिम्मेदारी; खाद्य, उपभोक्ता मामले और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भी संभालते रहेंगे जोशी
नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को सौंप दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करते हुए जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने का निर्देश दिया।
इसका अर्थ है कि प्रल्हाद जोशी को फिलहाल स्वतंत्र रूप से नया मंत्रालय आवंटित नहीं किया गया, बल्कि वे अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब परीक्षा प्रणाली, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और पेपर लीक रोकने के उपायों को लेकर शिक्षा मंत्रालय पर महत्वपूर्ण सुधार लागू करने का दबाव है।
कौन हैं प्रल्हाद जोशी?
प्रल्हाद वेंकटेश जोशी कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। वे वर्ष 2004 से लगातार इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं और 2024 के आम चुनाव में पांचवीं बार सांसद चुने गए।
जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक में हुआ। उन्होंने हुबली के शैक्षणिक संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से कला संकाय में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में उनकी रुचि रही।
मौजूदा विभागों के साथ संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय
प्रल्हाद जोशी पहले से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हैं। अब इन विभागों के साथ उन्हें शिक्षा मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में इससे पहले वे संसदीय कार्य, कोयला और खान जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। सरकार और संसद के बीच समन्वय स्थापित करने वाले संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनके पास विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया का लंबा अनुभव रहा है।
पांच बार से धारवाड़ के सांसद
प्रल्हाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में भी जीत दर्ज की।
कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहने के साथ वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें शिक्षा मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को सरकार का रणनीतिक फैसला माना जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय के सामने कई अहम चुनौतियां
नए दायित्व के साथ जोशी के सामने परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। शिक्षा मंत्रालय को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की पारदर्शिता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, तकनीकी प्रणाली और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही से जुड़े विषयों पर काम करना होगा।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा, पेपर लीक रोकने के लिए सुरक्षित तकनीक, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और शिकायतों के समयबद्ध समाधान जैसे मुद्दे भी उनके कार्यकाल की दिशा तय कर सकते हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का भी संभाल रहे नेतृत्व
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में जोशी केंद्र सरकार की स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस विभाग का उद्देश्य देश में सौर, पवन और अन्य गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की क्षमता बढ़ाना है। केंद्रीय मंत्रालय की आधिकारिक सूची में वे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के कैबिनेट मंत्री के रूप में दर्ज हैं।
इसके अलावा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्यान्न प्रबंधन और उपभोक्ता हितों से जुड़े कार्यक्रम भी उनके अधीन हैं।
अतिरिक्त प्रभार कब तक रहेगा, अभी स्पष्ट नहीं
राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना में प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की पुष्टि की गई है। हालांकि यह व्यवस्था कितने समय तक जारी रहेगी या बाद में पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री की अलग नियुक्ति होगी, इसे लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की नीतियों, परीक्षा सुधारों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर लिए जाने वाले अगले फैसलों पर नजर रहेगी।



