
कार्यालय में पुलिस प्रवेश पर राज्यसभा में हंगामा, खरगे और नड्डा के बीच तीखी बहस
विपक्ष ने छात्र नेता को गिरफ्तार करने के प्रयास पर गृहमंत्री से मांगा जवाब; नड्डा ने इसे सामान्य कानून-व्यवस्था की कार्यवाही बताया
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आठवें दिन राज्यसभा में दिल्ली पुलिस की कार्यवाही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। CPI(M) के राष्ट्रीय कार्यालय में पुलिस टीम के प्रवेश का मुद्दा उठने के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता जेपी नड्डा के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
जॉन ब्रिटास ने सदन में उठाया मामला
CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की एक टीम मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में पहुंची और पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष व छात्र नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। उनका दावा था कि टीम में शामिल कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे और कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पार्टी पदाधिकारियों को उचित सूचना नहीं दी गई।
ब्रिटास ने पुलिस की इस कार्यवाही को हाल में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जोड़ते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए पुलिस की प्रक्रिया और राजनीतिक दल के कार्यालय में प्रवेश करने के तरीके पर सवाल उठाए।
खरगे बोले—लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला
मल्लिकार्जुन खरगे ने CPI(M) कार्यालय में पुलिस टीम के प्रवेश को गंभीर बताते हुए पूछा कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में जाने का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यवाही लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्षी दलों में भय पैदा कर सकती है।
खरगे ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि कानून लागू करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की।
नड्डा ने पुलिस कार्यवाही का किया बचाव
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह सामान्य कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्यवाही की। उन्होंने विपक्ष पर मामले को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया।
नड्डा ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भी आंदोलन में भाग लेने के कारण कई बार पुलिस कार्यवाही का सामना कर चुके हैं। उन्होंने आपातकाल के दौरान कक्षा से गिरफ्तार किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि सक्रिय राजनीति या छात्र आंदोलनों में भाग लेने वालों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद विपक्षी सदस्यों का विरोध और तेज हो गया।
पुलिस ने बताया पुराने मामले से जुड़ी थी कार्यवाही
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि आइशी घोष के खिलाफ वर्ष 2021 में बेंगलुरु भवन के बाहर हुए एक प्रदर्शन से संबंधित मामले में गैर-जमानती वारंट जारी था। पुलिस टीम इसी वारंट की तामील के लिए CPI(M) कार्यालय पहुंची थी।
वहीं, पार्टी नेताओं ने पुलिस के कार्यालय में प्रवेश करने के तरीके पर आपत्ति जताई। पुलिस टीम बिना किसी गिरफ्तारी के वापस लौट गई। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल सामने नहीं आई थी।
छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्यवाही भी बनी मुद्दा
विपक्ष पिछले दिनों जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए छात्र मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्यवाही पर भी सरकार से जवाब मांग रहा है। यह प्रदर्शन परीक्षा अनियमितताओं और कथित पेपर लीक के खिलाफ आयोजित किया गया था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में 130 पुलिसकर्मी और करीब 65 छात्र घायल हुए थे तथा विभिन्न घटनाओं को लेकर 15 एफआईआर दर्ज की गईं। विपक्ष ने पुलिस बल के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए पूरे घटनाक्रम पर गृहमंत्री के बयान की मांग की है।
नारेबाजी के बीच सदन स्थगित
जेपी नड्डा के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे। सभापति ने सदस्यों को सदन के वेल में नहीं आने की चेतावनी दी, लेकिन हंगामा शांत नहीं हुआ। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई।



