मेरठ स्नेक मर्डर केस: पत्नी पर पति की हत्या की साजिश का आरोप, जांच में सामने आए नए दावे
पुलिस का दावा- नींद की गोलियां देकर सांप छोड़े जाने की आशंका, डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर जांच तेज

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चर्चित स्नेक मर्डर केस की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस की जांच में अब ऐसे कई तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिनके आधार पर पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित साजिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि मामले की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पुलिस के अनुसार, मृतक अतुल की मौत को पहले सामान्य सर्पदंश का मामला माना गया था, लेकिन बाद में सामने आए साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने जांच की दिशा बदल दी।
नींद की गोलियां देने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि घटना वाली रात मृतक को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर दी गईं, जिससे वह गहरी नींद में चला गया। इसके बाद कथित रूप से जहरीले सांप का इस्तेमाल कर हत्या की योजना को अंजाम देने की कोशिश की गई। पुलिस इन सभी दावों की वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के आधार पर पुष्टि करने में जुटी है।
डिजिटल सबूत भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बीमा राशि से जुड़ी आशंका
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से मृतक की बीमा राशि का उपयोग नए कारोबार में करने की योजना बनाई गई थी। इस पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है।
जेल में आरोपी की बदलती स्थिति
मामले में गिरफ्तार आरोपी महिला फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। जेल प्रशासन के अनुसार, वह अब अपने बेटे से मिलने की इच्छा जता रही है। वहीं परिजनों ने बच्चे को फिलहाल उसके दादा के संरक्षण में रखा है। मुलाकात को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
जल्द दाखिल हो सकती है चार्जशीट
मेरठ पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अंतिम चरण में है। फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेज पूरे होने के बाद आरोप पत्र (चार्जशीट) अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी।