सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित परिवारों को राहत, नगर निगम खरीदेगा टीडीआर
मेयर इन काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला, सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपये के ऋण प्रस्ताव को भी मिली अनुशंसा

शहर में मास्टर प्लान के तहत हो रहे चौड़ीकरण प्रभावितों के लिए शुक्रवार को हुई मेयर इन काउंसिल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत चौड़ीकरण से प्रभावितों की टीडीआर (ट्रांसफरबेल डेवलपमेंट राइट्स) खरीदी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके लिए विशेष कोष बनाया गया है। इससे चौड़ीकरण में प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।
शुक्रवार को मेयर इन काउंसिल की बैठक महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता एवं निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा उपस्थिति में हुई। बैठक में बिन्दुवार चर्चा की गई। इसमें सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मास्टर प्लान सडक़ों एवं अन्य अधोसंरचना विकास कार्य हेतु ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के क्रय एवं विक्रय के लिए हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लि. अथवा वाणिज्यिक बैंकों से प्रारंभिक स्तर पर आवश्यकता अनुसार 200 करोड़ के ऋण प्राप्त करने विषय पर अनुशंसा की गई। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (सबके लिए आवास 2022) के एएचपी घटक अंतर्गत शेष रही परियोजनाओं को पूर्ण किए जाने हेतु लगभग 15 करोड़ के ऋण लिए जाने हेतु प्रस्ताव पर अनुशंसा की गई।
इसके अलावा गदापुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंहपुरा होते हुए लालपुर ब्रिज रोड पर मार्ग चौड़ीकरण एवं निर्माण, दारु गोदाम से एमआर 5 तक मार्ग चौड़ीकरण के प्रकरण की स्वीकृति की अनुशंसा की गई।
बैठक में एमआईसी सदस्य रजत मेहता, प्रकाश शर्मा, अनिल गुप्ता, कैलाश प्रजापत, जितेंद्र कुवाल, डॉ. योगेश्वरी राठौर, दुर्गा चौधरी, सुगन बाघेला, अपर आयुक्त संतोष टैगोर, पवन कुमार सिंह, संदीप शिवा, पुनीत शुक्ला, उपायुक्त योगेंद्र सिंह पटेल, मनोज मौर्य, संजेश गुप्ता, अधीक्षण यंत्री प्रमोद मालवीय, आरके जैन, कार्यपालन यंत्री जगदीश मालवीय, सहायक यंत्री दीपक शर्मा, निर्झर शुक्ला, जनसंपर्क अधिकारी पवन कुमार उपस्थित रहे।
टीडीआर क्या है
टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सार्वजनिक परियोजनाओं जैसे सडक़ चौड़ीकरण के लिए जमीन या मकान का हिस्सा लेने पर प्रभावित व्यक्ति को अतिरिक्त निर्माण का अधिकार देना होता है। इसका उपयोग वह अपनी किसी अन्य संपत्ति पर अतिरिक्त निर्माण के लिए भी कर सकता है या नियमानुसार किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित या बेच सकता है। अब तक जिन मकानों का 75 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा प्रभावित होता, उन्हें नकद मुआवजा दिया जाता था, जबकि इससे कम प्रभावित संपत्तियों को टीडीआर देने का प्रावधान है। बड़ी संख्या में लोग टीडीआर का उपयोग नहीं कर पाते। कई लोगों के पास दूसरी जमीन नहीं होती, कुछ को अतिरिक्त निर्माण की जरूरत नहीं होती और कई लोग टीडीआर खरीद भी नहीं पाते। इसी कारण नगर निगम ने इसे सीधे खरीदने की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया।
लोगों को मिलेगी राहत
नगर निगम के टीडीआर खरीदी के फैसले से करीब 3 हजार लोगों को राहत मिलेगी। यह लोग टीडीआर बेचकर मकानों का निर्माण कर सकेंगे और नई जगह पर भवन ले सकेंगे।



