राजनीति में नहीं जाएंगे अभिजीत दीपके, पिता बोले—उन्हें सिविल सेवा में देखना मेरा सपना
CJP आंदोलन समाप्त होने के बाद पिता भगवान शंकर दीपके का बयान; कहा—विदेश में पढ़ाई के लिए लिया एजुकेशन लोन आज भी चुका रहा हूं

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक चले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समाप्त होने के बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच उनके पिता भगवान शंकर दीपके ने स्पष्ट किया है कि उनका बेटा सक्रिय राजनीति में जाने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से अभिजीत को सिविल सेवा में देखना चाहते थे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपनी प्रमुख मांग पूरी होने का दावा करते हुए 20 जून से जारी आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन के दौरान अभिजीत युवाओं और विद्यार्थियों के बीच प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। इसके बाद उनके किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या नया राजनीतिक विकल्प बनाने की अटकलें लगने लगी थीं।
पिता ने राजनीति की अटकलों को किया खारिज
एक साक्षात्कार में भगवान शंकर दीपके ने कहा कि उनके परिवार का राजनीति से कोई जुड़ाव नहीं रहा है। परिवार में अब तक कोई व्यक्ति सरपंच जैसे स्थानीय पद पर भी नहीं रहा। ऐसे में अभिजीत के राजनीति में प्रवेश करने की चर्चाओं का कोई आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक पिता के रूप में उनकी इच्छा थी कि अभिजीत संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर सिविल सेवा में जाएं। उनका मानना था कि प्रशासनिक सेवा में रहकर वह समाज के लिए कार्य करने के साथ अपना भविष्य भी सुरक्षित बना सकते हैं।
बेटे की पहचान से पिता भी हैरान
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि अभिजीत इतने कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना लेंगे। सोशल मीडिया से शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे विद्यार्थियों के आंदोलन में बदल गया और जंतर-मंतर तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि बेटे को मिले समर्थन पर उन्हें प्रसन्नता है, लेकिन वह चाहते हैं कि अभिजीत अपनी शिक्षा और पेशेवर भविष्य पर भी ध्यान दें। सार्वजनिक पहचान बनने का अर्थ अनिवार्य रूप से राजनीति में प्रवेश करना नहीं है।
इंजीनियरिंग में नहीं लगा मन, चुनी पत्रकारिता
अभिजीत की शुरुआती पढ़ाई छत्रपति संभाजीनगर के सरस्वती भुवन कॉलेज से हुई। पिता स्वयं सिविल इंजीनियर हैं और चाहते थे कि उनका बेटा भी तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़े। इसी कारण अभिजीत ने पुणे के सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था।
हालांकि, इंजीनियरिंग में रुचि नहीं बनने के कारण उन्होंने अपना क्षेत्र बदल लिया। बाद में तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2021 में स्नातक होने के बाद उन्होंने संचार और सोशल मीडिया से जुड़े विभिन्न दायित्वों पर काम किया।
विदेश में पढ़ाई के लिए लिया था एजुकेशन लोन
पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिजीत ने पब्लिक रिलेशंस में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की इच्छा जताई। भगवान शंकर दीपके ने बताया कि उस समय वह सेवानिवृत्ति के करीब थे, लेकिन बेटे की पढ़ाई में आर्थिक बाधा न आए, इसलिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया।
इसी ऋण की सहायता से अभिजीत अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ने गए। उनके पिता के अनुसार विदेश में शिक्षा के लिए लिया गया कर्ज अब तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और वह आज भी उसकी मासिक किस्तें जमा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया के सवाल से शुरू हुआ CJP अभियान
बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सवाल किया था कि यदि सभी ‘कॉकरोच’ एकजुट हो जाएं तो क्या होगा। इसी विचार से कॉकरोच जनता पार्टी नामक ऑनलाइन अभियान की शुरुआत हुई।
कुछ ही समय में इस अभियान को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिला। बाद में परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर यह अभियान जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के रूप में सामने आया।
आंदोलन समाप्त, आगे की भूमिका पर नजर
CJP ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा उसकी प्रमुख मांग स्वीकार किए जाने के बाद जंतर-मंतर का आंदोलन समाप्त किया गया है। हालांकि, संगठन भविष्य में छात्रों और युवाओं से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहेगा या नहीं, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत घोषणा नहीं की गई है।
अभिजीत की ओर से भी अपने राजनीतिक या पेशेवर भविष्य को लेकर औपचारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल उनके पिता के बयान ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश की अटकलों को विराम देने का प्रयास किया है।



