महाकाल लोक में दिखेगी ऋषि परंपरा की भव्य झलक, लाल बलुआ पत्थर से तैयार हो रहीं प्रतिमाएं
सप्तऋषियों के साथ भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमाएं होंगी स्थापित, पेडस्टल व फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में

उज्जैन। महाकाल लोक की भव्यता में जल्द ही भारतीय ऋषि परंपरा की एक और आकर्षक झलक देखने को मिलेगी। परिसर में सप्तऋषियों, भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की स्थायी पत्थर की प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इन प्रतिमाओं को राजस्थान के प्रसिद्ध बंसी पहाड़पुर और बयाना के लाल बलुआ पत्थर से तराशा जा रहा है।
हरिफाटक क्षेत्र स्थित हाट बाजार में इन प्रतिमाओं का निर्माण कार्य लंबे समय से जारी है। अधिकांश मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं और अब उनके पेडस्टल, फिनिशिंग तथा अन्य अंतिम कार्य किए जा रहे हैं।
ध्यान और आशीर्वाद की मुद्रा में नजर आएंगे सप्तऋषि
महाकाल लोक में महर्षि कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इनके साथ भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमाएं भी परिसर का हिस्सा बनेंगी।
मूर्तियों में ऋषियों को ध्यान, शांति और आशीर्वाद की विभिन्न मुद्राओं में दर्शाया गया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को भारतीय ज्ञान, साधना और ऋषि परंपरा से परिचित कराना है।
देश के अनुभवी मूर्तिकार कर रहे काम
इस प्रोजेक्ट के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों के कुशल शिल्पकारों को जोड़ा गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मूर्तिकार ईश्वर चंद्र महाराणा और उनकी टीम लंबे समय से इन प्रतिमाओं को आकार देने में जुटी है। बंसी पहाड़पुर का लाल बलुआ पत्थर अपनी मजबूती और कलात्मक नक्काशी के लिए जाना जाता है।
करीब छह महीने में महाकाल लोक में स्थापना
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजीव कुमार मालवीय के अनुसार, प्रतिमाओं का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है। फिलहाल पेडस्टल और फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। योजना के अनुसार लगभग छह महीने के भीतर इन प्रतिमाओं को महाकाल लोक परिसर में स्थापित किया जा सकता है।
प्रतिमाओं की स्थापना के बाद महाकाल लोक में आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के दर्शन के साथ प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी।



