हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा उज्जैन, पंचम सवारी में 84 महादेव के हुए दर्शन
भाद्रपद के प्रथम सोमवार निकली बाबा महाकाल की पंचम सवारी, रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया पूजन-अभिषेक; 1100 वैदिक बटुकों के मंत्रोच्चार और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने बढ़ाई भव्यता

उज्जैन, 31 अगस्त 2026। भाद्रपद माह के प्रथम सोमवार को उज्जैन एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया। भगवान महाकालेश्वर की पंचम सवारी परंपरागत श्रद्धा और भव्यता के साथ निकली। सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालु हर-हर महादेव और जय महाकाल के जयकारे लगाते हुए बाबा के दर्शन के लिए उमड़े।
सवारी से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान चंद्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन और आरती की गई। इसके बाद पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। सवारी में भगवान महाकाल पांच अलग-अलग स्वरूपों में विराजित रहे। पालकी में चंद्रमोलेश्वर, गजराज पर मनमहेश, गरुड़ पर शिवतांडव, नंदी पर उमा-महेश और रथ पर होल्कर स्वरूप के दर्शन हुए।
मुख्यमंत्री ने रामघाट पर किया पूजन
भगवान महाकाल की पालकी रामघाट पहुंची, जहां क्षिप्रा नदी के जल से विधिवत पूजन-अभिषेक किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। उन्होंने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना और आरती में भाग लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पालकी को कंधा देकर सवारी में सहभागिता की। रामघाट पर पालकी पहुंचने के दौरान शंखनाद और मंदिर बैंड की शिवधुनों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
1100 वैदिक बटुकों ने किया मंत्रोच्चार
पंचम सवारी को विशेष रूप से भव्य बनाने के लिए रामघाट और दत्त अखाड़ा क्षेत्र में 1100 वैदिक बटुकों ने वेद मंत्रों का उच्चारण किया। वैदिक घोष से क्षिप्रा का तट गूंज उठा और श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।
हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
रामघाट पर पूजन के दौरान भगवान महाकाल की पालकी पर हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्पवर्षा की गई। इससे सवारी का दृश्य और भी आकर्षक बन गया।
पहली बार सवारी में 84 महादेव की झांकियां
इस बार पंचम सवारी की खास विशेषता 84 महादेव की झांकियां रहीं। बाबा महाकाल के साथ उज्जैन के चौरासी महादेव के विभिन्न स्वरूपों को शामिल किया गया। इससे श्रद्धालुओं को एक ही सवारी में प्राचीन धार्मिक परंपरा से जुड़े 84 महादेव के दर्शन का अवसर मिला।
जनजातीय कलाकारों ने बिखेरी लोक संस्कृति
सवारी मार्ग पर मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति की भी झलक देखने को मिली। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे 8 जनजातीय दलों के करीब 500 कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। भगोरिया, भील और राठवा सहित विभिन्न लोक नृत्यों ने सवारी के माहौल को और जीवंत कर दिया।
भीड़ प्रबंधन में तकनीक का इस्तेमाल
इस बार सवारी में धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। श्रद्धालुओं की भीड़ के आंकलन और क्राउड एनालिटिक्स के लिए आधुनिक रोबोट की सहायता ली गई। इसका उद्देश्य सवारी मार्ग पर भीड़ के सुगम प्रबंधन में प्रशासन की मदद करना रहा।
इन मार्गों से होकर मंदिर लौटी सवारी
रामघाट से पूजन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक और गोपाल मंदिर होते हुए पटनी बाजार तथा गुदरी चौराहा पहुंची। गोपाल मंदिर पर सिंधिया ट्रस्ट के पुजारियों ने पालकी में विराजित चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया। इसके बाद सवारी वापस महाकाल मंदिर पहुंची और विश्राम हुआ।
7 सितंबर को निकलेगी अंतिम राजसी सवारी
भाद्रपद माह की सवारियों के क्रम में भगवान महाकाल की अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर 2026, सोमवार को निकलेगी। इसमें पालकी में चंद्रमोलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नंदी रथ पर उमा-महेश और अन्य पारंपरिक स्वरूप शामिल रहेंगे। राजसी सवारी में बड़ी संख्या में भजन मंडलियां भी शामिल होंगी।




