अस्पताल से छुट्टी के बाद राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी देते हुए बोले—अहिंसा और सत्य का रास्ता आज भी प्रासंगिक; लद्दाख आंदोलन के समर्थकों का जताया आभार

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वांगचुक ने कहा कि वर्तमान दौर में भी महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा पर आधारित मार्ग पूरी तरह प्रासंगिक है।

लद्दाख लौटने से पहले वांगचुक ने राजघाट पहुंचने का निर्णय लिया था। अस्पताल से जारी वीडियो संदेश में उन्होंने बताया था कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और शरीर में धीरे-धीरे ताकत वापस लौट रही है।

बोले—अब पहले से काफी बेहतर हूं

सोनम वांगचुक ने वीडियो संदेश में कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने का दिन आखिरकार आ गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया गया और अब वे पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि लंबे उपवास के बाद फिलहाल धीरे-धीरे भोजन लेना शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सामान्य होने में कुछ समय लगेगा, लेकिन उनकी स्थिति संतोषजनक है। उन्होंने उपचार और देखभाल के लिए चिकित्सकों तथा अस्पताल के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

लद्दाख लौटने से पहले पहुंचे राजघाट

वांगचुक ने कहा कि अपने घर लद्दाख लौटने से पहले वह महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना चाहते थे। राजघाट पहुंचकर उन्होंने बापू को नमन किया और शांतिपूर्ण आंदोलनों में गांधीवादी विचारों की उपयोगिता को रेखांकित किया।

उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संयम, सत्याग्रह और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखना सबसे प्रभावी माध्यम है। किसी भी आंदोलन की वास्तविक शक्ति जनता का विश्वास और शांतिपूर्ण भागीदारी होती है।

समर्थकों को दिया आंदोलन की सफलता का श्रेय

सोनम वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर चले आंदोलन का समर्थन करने वाले नागरिकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी आवाज उठाकर आंदोलन को मजबूती दी।

वांगचुक ने इसे किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि के बजाय सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि लोगों की एकजुटता और निरंतर समर्थन से आंदोलन अपने उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ सका।

लंबे उपवास के बाद अस्पताल में हुआ उपचार

लंबी भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और शुरुआती दिनों में तरल तथा अर्धतरल आहार दिया गया।स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी। अब वे कुछ समय आराम करने के बाद लद्दाख लौटेंगे।

गांधीवादी तरीके से आगे भी आवाज उठाने का संकेत

राजघाट यात्रा के दौरान वांगचुक ने संकेत दिया कि जनहित से जुड़े विषयों पर उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक तथा अहिंसक तरीके से अपनी बात सामने रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल विरोध से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवाद और सामूहिक जिम्मेदारी से संभव है।

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