E20 पेट्रोल के खिलाफ दिल्ली में फिर तेज होगा विरोध, 31 जुलाई से 4 अगस्त तक तीन बड़े कार्यक्रम
‘गाड़ी मार्च’, राष्ट्रीय टाउनहॉल और संसद मार्च की तैयारी; प्रदर्शनकारी पुराने वाहनों के लिए E10 या शुद्ध पेट्रोल का विकल्प मांग रहे

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर चला छात्र आंदोलन समाप्त होने के बाद राजधानी दिल्ली में अब E20 पेट्रोल नीति के विरोध ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और परिवहन संगठनों ने 31 जुलाई से 4 अगस्त के बीच अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है। इन प्रदर्शनों में उपभोक्ताओं को ई20 के साथ कम इथेनॉल वाले या बिना इथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प देने की मांग प्रमुख रहेगी।
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह नीति कच्चे तेल के आयात और उत्सर्जन को कम करने के साथ जैव ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई है। सरकार ने संसद में बताया है कि विस्तृत परीक्षणों के दौरान ई20 से वाहन प्रदर्शन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव या बड़ी अनुकूलता समस्या सामने नहीं आई।
31 जुलाई को निकलेगा ‘गाड़ी मार्च’
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने 31 जुलाई को दिल्ली में E20 नीति के खिलाफ ‘गाड़ी मार्च’ आयोजित करने की घोषणा की है। प्रस्तावित कार्यक्रम इंडिया गेट से संसद मार्ग की दिशा में निकाला जाना है। आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताते हुए वाहन मालिकों और नीति से प्रभावित होने का दावा करने वाले लोगों से शामिल होने की अपील की है।
इस अभियान से जुड़े कार्यकर्ता अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण पर पुनर्विचार, उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने की स्वतंत्रता और नीति की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की मांग उठा रहे हैं।
एक अगस्त को केजरीवाल का राष्ट्रीय टाउनहॉल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक अगस्त को नई दिल्ली में ‘नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20’ आयोजित करने की घोषणा की है। कार्यक्रम के माध्यम से वाहन मालिकों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों की चिंताओं को सार्वजनिक मंच पर सामने रखने की तैयारी है।
पार्टी ने इस कार्यक्रम को जनसंवाद के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें E20 पेट्रोल के माइलेज, वाहन अनुकूलता, रखरखाव खर्च और उपभोक्ता विकल्प से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की संभावना है।
चार अगस्त को संसद मार्च करेंगे ट्रांसपोर्टर
दिल्ली के टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर और टूर ऑपरेटर संगठनों ने चार अगस्त को संसद की ओर मार्च करने का ऐलान किया है। संगठनों का कहना है कि E20 नीति लागू करने से पहले पुराने वाहनों और व्यावसायिक परिवहन पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।
ट्रांसपोर्टर संगठनों ने वाहन मालिकों, उपभोक्ताओं, ऑटोमोबाइल कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए व्यापक अध्ययन कराने की मांग की है।
‘E20 जनता पार्टी’ ने बढ़ाई डिजिटल सक्रियता
नीट आंदोलन के दौरान चर्चा में आए डिजिटल अभियान की तर्ज पर सोशल मीडिया पर ‘E20 जनता पार्टी’ नाम से नया समूह सक्रिय हुआ है। यह समूह ई20 का पूर्ण विरोध करने के बजाय पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है।
समूह से जुड़े सोशल मीडिया खातों पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई जा रही है। हालांकि यह कोई पंजीकृत राजनीतिक दल है या केवल डिजिटल दबाव समूह, इस पर औपचारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे सवाल
E20 नीति का विरोध करने वाले वाहन मालिकों का दावा है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से पुराने वाहनों का माइलेज कम हुआ है और रखरखाव का खर्च बढ़ा है। संसद की परिवहन संबंधी समिति के कुछ सदस्यों ने भी अधिकारियों से पूछा है कि गैर-E20 अनुकूल वाहनों के मालिकों को संभावित माइलेज गिरावट के बारे में पहले पर्याप्त जानकारी क्यों नहीं दी गई।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि नई और E20 अनुकूल गाड़ियों के लिए यह ईंधन जारी रखा जा सकता है, लेकिन पुराने वाहनों के लिए E10 अथवा बिना इथेनॉल वाले पेट्रोल की बिक्री भी की जाए।
सरकार ने कहा—ई20 सुरक्षित, पीछे लौटने की योजना नहीं
केंद्र सरकार ने E20 पेट्रोल को स्वच्छ और परीक्षण से प्रमाणित ईंधन बताते हुए पुराने मानक पर वापस लौटने की संभावना से इनकार किया है। सरकारी पक्ष के अनुसार ई20 के उपयोग से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, प्रदूषण कम होगा और घरेलू इथेनॉल उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
सरकार का कहना है कि वाहन और ईंधन उद्योग से जुड़े संस्थानों ने ई20 का परीक्षण किया है। दूसरी ओर, विरोध कर रहे संगठन उपभोक्ताओं के वास्तविक अनुभवों और पुराने वाहनों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अलग अध्ययन चाहते हैं।
डीपफेक और कथित मानहानिकारक पोस्ट पर गडकरी पहुंचे कोर्ट
E20 विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन सोशल मीडिया पोस्ट और कथित डीपफेक वीडियो को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है, जिनमें उन्हें तथा उनके परिवार को इथेनॉल नीति से आर्थिक लाभ होने के आरोपों से जोड़ा गया था। अदालत ने उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अज्ञात सामग्री निर्माताओं के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दी है।
गडकरी ने इन आरोपों को झूठा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। इसलिए E20 नीति पर तथ्यात्मक आलोचना और बिना प्रमाण लगाए जा रहे व्यक्तिगत आरोपों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
आंदोलन का प्रस्तावित कार्यक्रम
31 जुलाई: तहसीन पूनावाला के नेतृत्व में ‘गाड़ी मार्च’
1 अगस्त: अरविंद केजरीवाल का राष्ट्रीय E20 टाउनहॉल
4 अगस्त: टैक्सी और परिवहन संगठनों का संसद मार्च



