भैरवगढ़ जेल में गुरु पूर्णिमा पर ‘मार्गदर्शक दिवस’, बंदियों को मिला नई शुरुआत का संदेश
लगातार पांचवें वर्ष आयोजित कार्यक्रम में कृष्णा गुरुजी ने आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक बदलाव का बताया महत्व

उज्जैन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में लगातार पांचवें वर्ष ‘मार्गदर्शक दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को आत्मचिंतन, अनुशासन और आत्मसुधार के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी गई। आध्यात्मिक विचारक कृष्णा गुरुजी ने बंदियों से कहा कि कारावास की अवधि को केवल दंड के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं की गलतियों को समझने और जीवन को नई दिशा देने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महाकाल को परम गुरु मानकर सामूहिक गुरु पूजन से हुई। जेल प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों और बंदियों ने धार्मिक एवं प्रेरणादायक आयोजन में सहभागिता की।
नकारात्मक भावनाएं गलत दिशा में ले जाती हैं
कृष्णा गुरुजी ने अपने संबोधन में बंदियों को क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, अहंकार और प्रतिशोध जैसी भावनाओं से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्ति क्षणिक आवेश या गलत संगति के कारण ऐसा कदम उठा लेता है, जिसका प्रभाव उसके पूरे जीवन और परिवार पर पड़ता है।
उन्होंने समझाया कि गुरु केवल कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि सही ज्ञान, विवेक और उचित दिशा का प्रतीक होता है। जो व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार कर उनसे सीखता है, उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत हो जाती है।
जेल प्रशासन को बताया वर्तमान मार्गदर्शक
कार्यक्रम में कृष्णा गुरुजी ने कहा कि बंदियों के कारावास में रहने तक जेल प्रशासन उनके लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। जेल के नियमों का पालन, अनुशासित दिनचर्या और सुधारात्मक गतिविधियों में सहभागिता भविष्य के बेहतर जीवन की आधारशिला बन सकती है।
उन्होंने बंदियों से कहा कि जेल से बाहर निकलने के बाद ऐसे लोगों का साथ चुनें, जो उन्हें परिवार, समाज और जिम्मेदार जीवन की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।
भजनों ने बनाया भावुक वातावरण
आयोजन के दौरान कर्म, आत्मा और परमात्मा से जुड़े प्रेरक भजनों की प्रस्तुति दी गई। भजनों के माध्यम से व्यक्ति को अपने कर्मों की समीक्षा करने और गलतियों के प्रति पश्चाताप के साथ सुधार का संकल्प लेने का संदेश दिया गया।
सामूहिक भजन गायन के दौरान कई बंदी भावुक दिखाई दिए। गुरु की कृपा, माता-पिता के महत्व और जीवन में सही मार्गदर्शन से जुड़े भजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया।
पौधे बांटकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सामूहिक महाकाल पूजन के बाद बंदियों को प्रसाद के रूप में पेड़-पौधे वितरित किए गए। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जीवन में नई शुरुआत का संदेश दिया गया। पौधों की देखभाल को धैर्य, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से जोड़ते हुए बंदियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी गई।
बाहर निकलने के बाद दोबारा न दोहराएं गलती
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर जेल आने का उद्देश्य बंदियों के भीतर ज्ञान, ध्यान और सत्संग के माध्यम से विवेक जागृत करना है। उन्होंने बंदियों से आग्रह किया कि रिहाई के बाद परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें तथा ऐसा कोई काम दोबारा न करें, जिससे उन्हें फिर जेल लौटना पड़े।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति का अतीत चाहे जैसा रहा हो, लेकिन सही संकल्प, अनुशासन और मार्गदर्शन से भविष्य को बदला जा सकता है। गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश भी यही है कि मनुष्य अपनी कमजोरियों को पहचानकर ज्ञान और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़े।



