उज्जैन रेलवे स्टेशन पर 40 दिन की वन-वे व्यवस्था, प्लेटफॉर्म-1 से प्रवेश और 8 से निकास
श्रावण-भादौ में संभावित भीड़ को देखते हुए रेलवे का प्रयोग; देवासगेट क्षेत्र से ऑटो पार्किंग हटाई, ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

उज्जैन। श्रावण-भादौ मास में भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उज्जैन रेलवे स्टेशन पर पहली बार वन-वे यात्री व्यवस्था लागू की गई है। अगले 40 दिनों तक यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर-1 की ओर से स्टेशन में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि बाहर निकलने की व्यवस्था प्लेटफॉर्म नंबर-8 की ओर से रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत देवासगेट की ओर स्थित प्लेटफॉर्म नंबर-1 को केवल प्रवेश के लिए उपयोग किया जाएगा। वहीं माधवनगर की ओर स्थित प्लेटफॉर्म नंबर-8 से यात्रियों का निकास कराया जाएगा। माल गोदाम की दिशा से स्टेशन में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
प्लेटफॉर्म-1 के बाहर से हटाई ऑटो पार्किंग
यात्रियों के प्रवेश मार्ग को व्यवस्थित रखने के लिए प्लेटफॉर्म नंबर-1 के बाहर संचालित ऑटो पार्किंग को भी हटा दिया गया है। रेलवे और सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ऑटो तथा अन्य वाहनों की भीड़ के कारण प्रवेश क्षेत्र में दबाव बढ़ता था। नई व्यवस्था से स्टेशन परिसर में पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सकेगा।
यात्रियों और वाहन चालकों को निर्धारित पार्किंग तथा यातायात व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रतिदिन 95 हजार से अधिक यात्रियों के आने का अनुमान
आरपीएफ थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि श्रावण-भादौ में स्टेशन पर भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश और निकास के मार्ग अलग किए गए हैं। पिछले वर्ष इस अवधि में प्रतिदिन करीब 70 हजार यात्रियों का आवागमन दर्ज किया गया था।
महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। रेलवे को इस बार श्रावण-भादौ के दौरान प्रतिदिन 95 हजार से अधिक यात्रियों के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए भीड़ प्रबंधन की अतिरिक्त तैयारियां की जा रही हैं।
1200 यात्रियों के लिए बनेगा वाटरप्रूफ होल्डिंग एरिया
रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर करीब 1200 यात्रियों की क्षमता वाला वाटरप्रूफ होल्डिंग एरिया तैयार किया जा रहा है। अधिक भीड़ होने पर यात्रियों को यहां कुछ समय के लिए रोका जाएगा और प्लेटफॉर्म की स्थिति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया जाएगा।
होल्डिंग एरिया में बैठने, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे स्टेशन के प्रवेश द्वार और प्लेटफॉर्म पर एक साथ अत्यधिक भीड़ जमा होने से रोका जा सकेगा।
ड्रोन और अतिरिक्त CCTV कैमरों से निगरानी
स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ पर नजर रखने के लिए पहली बार ड्रोन का उपयोग करने की तैयारी की गई है। ड्रोन से प्रवेश मार्ग, निकास क्षेत्र, पार्किंग और स्टेशन के बाहर यात्री दबाव की वास्तविक समय में जानकारी सुरक्षा अधिकारियों को मिल सकेगी।
रेलवे स्टेशन पर CCTV कैमरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने या आपात स्थिति बनने पर कंट्रोल रूम से तत्काल संबंधित टीम को सूचना दी जाएगी।
50 अतिरिक्त सुरक्षा जवानों की मांग
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्री व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे ने 50 अतिरिक्त सुरक्षा जवानों की मांग की है। जवानों को प्लेटफॉर्म, प्रवेश-निकास द्वार, फुटओवर ब्रिज, पार्किंग और स्टेशन के आसपास के प्रमुख स्थानों पर तैनात किया जाएगा।
रेलवे और आरपीएफ की टीमें यात्रियों को निर्धारित मार्गों की जानकारी भी देंगी। इसके लिए स्टेशन परिसर में संकेतक बोर्ड लगाने और उद्घोषणा प्रणाली से लगातार सूचना प्रसारित करने की व्यवस्था की जा रही है।
सिंहस्थ-2028 के लिए भीड़ प्रबंधन का अभ्यास
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, श्रावण-भादौ में लागू वन-वे व्यवस्था आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण अभ्यास साबित होगी। इस दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं, यात्रियों की प्रतिक्रिया और प्रवेश-निकास व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा।
प्रयोग सफल रहने पर भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों और अत्यधिक यात्री दबाव के दौरान इसी मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे निर्धारित प्रवेश और निकास मार्ग का उपयोग करते हुए सुरक्षा कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।



