
राहुल गांधी ने लॉन्च किया ‘सत्याग्रह’ डिजिटल प्लेटफॉर्म, देशभर के आंदोलनों की जानकारी एक जगह जुटाने की पहल
लोगों से अपनी समस्याएं और संघर्ष की कहानी साझा करने की अपील; प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग मुद्दों से जुड़े आंदोलनों को नक्शे के जरिए जोड़ा जाएगा
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार, 3 अक्टूबर को ‘सत्याग्रह’ नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे मुद्दा आधारित आंदोलनों और लोगों के संघर्षों की जानकारी को एक मंच पर लाना है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से अपनी समस्याओं और संघर्ष की कहानी इस प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की।
राहुल गांधी के मुताबिक, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं और अन्य समूह अपने-अपने मुद्दों को लेकर अलग-अलग जगहों पर संघर्ष कर रहे हैं। ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म पर इन आंदोलनों की जानकारी दर्ज की जा सकेगी और समान मुद्दों पर चल रहे दूसरे आंदोलनों को भी इंटरैक्टिव मैप के जरिए देखा जा सकेगा।
कैसे काम करेगा ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म?
प्लेटफॉर्म पर आंदोलन या अभियान से जुड़े लोग अपनी पहचान, संगठन अथवा समूह का नाम और अपने मुद्दे की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके जरिए समान मुद्दों पर काम कर रहे दूसरे समूहों की जानकारी भी हासिल की जा सकती है।
राहुल गांधी ने कहा है कि जरूरत के अनुसार वे इन मुद्दों को संसद में उठाने, पत्र लिखने या आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ अन्य माध्यमों से खड़े होने की कोशिश करेंगे। यह पहल उनके नेता प्रतिपक्ष के तौर पर लोगों के मुद्दों से जुड़ने के प्रयास के रूप में पेश की गई है।
महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जोड़ा नाम
राहुल गांधी ने इस डिजिटल पहल का नाम ‘सत्याग्रह’ रखा है। उन्होंने महात्मा गांधी की सत्याग्रह की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग संघर्षों की आवाजों को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है।
साबरमती आश्रम के अभिलेखागार में महात्मा गांधी को भेजे गए 8,500 से अधिक पत्र और अन्य संचार सुरक्षित होने का उल्लेख आश्रम के रिकॉर्ड में मिलता है। ये पत्र मुख्य रूप से अंग्रेजी, गुजराती और हिंदी में हैं। आश्रम ने इन्हें संरक्षित कर प्रकाशित करने की परियोजना भी शुरू की थी।
हालांकि, इन पत्रों को राहुल गांधी की मौजूदा पहल से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड यह बताता है कि गांधी के पास बड़ी संख्या में लोगों के पत्र आते थे और उनमें अलग-अलग विषयों से जुड़े संवाद शामिल थे।
चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्ष का विरोध
इसी बीच चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और आयोग के बीच मतभेद भी चर्चा में हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक पहुंच और चुनावी रोल से जुड़े तकनीकी मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR सहित उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने IT सिस्टम और प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए भी कदमों की जानकारी दी।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी उठा
SIR से जुड़े विवाद में गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी सामने आया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय Electoral Registration Officers ने इन मतदाताओं को पात्र पाया था, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं हो सके। रिपोर्ट में इसके पीछे चुनावी सॉफ्टवेयर में संबंधित प्रक्रिया की तकनीकी समस्या का उल्लेख किया गया है।
बाद में चुनाव आयोग ने बताया कि इन मतदाताओं के संबंध में घर-घर जाकर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए और 97 में से 81 लोगों ने Form-6 भर दिया था।



