3 अगस्त से निकलेगी बाबा महाकाल की पहली सवारी, कांवड़ यात्रियों के लिए तय हुए प्रवेश के दिन

श्रावण-भादौ में भीड़ नियंत्रण के लिए नई दर्शन व्यवस्था लागू होगी; शनिवार, रविवार और सोमवार को कांवड़ दलों को प्रवेश नहीं

उज्जैन। श्रावण और भादौ मास में महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष योजना तैयार की है। बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारियों के साथ सामान्य श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग निर्धारित किए गए हैं।

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक कलेक्टर एवं समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सवारी मार्ग, मंदिर में प्रवेश और निकास, कांवड़ यात्रियों की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं तथा यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा हुई।

3 अगस्त को निकलेगी पहली सवारी

श्रावण मास में बाबा महाकाल की पहली पारंपरिक सवारी 3 अगस्त 2026 को निकाली जाएगी। श्रावण में कुल चार और भादौ मास में दो सवारियां प्रस्तावित हैं। अंतिम एवं राजसी सवारी 7 सितंबर 2026 को निकाली जाएगी।

प्रशासन ने सवारी मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बैरिकेडिंग लगाने और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। भीड़ वाले स्थानों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की विशेष तैनाती की जाएगी।

सामान्य श्रद्धालुओं के लिए यह रहेगा दर्शन मार्ग

सामान्य श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय क्षेत्र से नंदी द्वार की ओर प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु महाकाल लोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल मार्ग, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम से होते हुए भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे।

नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग बनाया जाएगा। मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ जमा न हो, इसके लिए प्रवेश और निकास व्यवस्था को अलग-अलग रखने की तैयारी है।

भगवान महाकाल को जल अर्पित करने के लिए सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में विशेष जलपात्र रखे जाएंगे। श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थान से ही जल अर्पित करने की अनुमति होगी।

सप्ताह में चार दिन कांवड़ दलों को मिलेगा प्रवेश

कांवड़ यात्रियों के लिए मंदिर प्रशासन ने अलग व्यवस्था तय की है। कांवड़ दलों को केवल मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

कांवड़ यात्रियों का प्रवेश द्वार क्रमांक-1 और हरसिद्धि चौराहे से बनाए गए विशेष मार्ग के माध्यम से कराया जाएगा। दलों को व्यवस्थित क्रम में मंदिर तक पहुंचाने के लिए पुलिस और मंदिर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।

शनिवार से सोमवार तक प्रवेश पर रोक

श्रावण मास में शनिवार, रविवार और सोमवार को मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रहती है। इसी कारण इन तीन दिनों में किसी भी कांवड़ दल को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रशासन ने कांवड़ यात्रियों से निर्धारित दिनों में ही उज्जैन आने और तय मार्ग का पालन करने की अपील की है। इससे सामान्य श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों दोनों को कम समय में सुरक्षित दर्शन कराने में मदद मिलेगी।

भीड़ बढ़ने से पहले सक्रिय होंगी व्यवस्थाएं

इस बार भीड़ नियंत्रण के लिए प्रोएक्टिव मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत किसी क्षेत्र में भीड़ बढ़ने से पहले ही वैकल्पिक मार्ग, अतिरिक्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय की जाएगी।

मंदिर परिसर, महाकाल लोक और प्रमुख प्रवेश मार्गों की लगातार निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार दर्शन मार्ग में आवश्यक बदलाव भी किए जा सकेंगे।

कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा निर्धारित व्यवस्था का पालन करने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को समन्वय के साथ तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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