गुरु पूर्णिमा पर सांदीपनि आश्रम में होगा विद्यारंभ संस्कार, बच्चे लिखेंगे भगवान कृष्ण के तीन मंत्र
श्रीकृष्ण और सांदीपनि मुनि का पवित्र नदियों के जल से होगा अभिषेक; आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत पाटी पूजन की विशेष तैयारी

उज्जैन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंगलनाथ मार्ग स्थित प्राचीन सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली माने जाने वाले इस आश्रम में छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार और पाटी पूजन कराया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आश्रम के पुजारी पंडित कीर्ति रूपम व्यास के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि मुनि का गंगा, गोमती तथा प्रयागराज से लाए गए पवित्र जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराकर मोगरे के फूलों से आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा।
बच्चों से लिखवाए जाएंगे तीन विशेष मंत्र
गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने छोटे बच्चों को लेकर आश्रम पहुंचेंगे। यहां विधि-विधान से पाटी पूजन कराने के बाद बच्चों से वे तीन मंत्र लिखवाए जाएंगे, जिन्हें धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा के आरंभ में लिखा था।
इस अनुष्ठान को विद्यारंभ या विद्या-बुद्धि संस्कार भी कहा जाता है। इसमें गुरु के समक्ष पाटी रखकर उसका पूजन कराया जाता है और बच्चे औपचारिक रूप से अक्षर ज्ञान की शुरुआत करते हैं। धार्मिक परंपरा में पाटी पूजन को जीवन के प्रमुख संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है।
श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा का होगा पूजन
आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा की प्रतिमाओं का अभिषेक और विशेष पूजन किया जाएगा। इसके बाद महाआरती होगी तथा उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाएगा। बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासन, गुरु के सम्मान और संस्कारों का महत्व भी बताया जाएगा।
मंदिर के पुजारी के अनुसार, सांदीपनि आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वाह लंबे समय से किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी आश्रम में गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी।
64 दिनों में प्राप्त किया था विद्याओं और कलाओं का ज्ञान
प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी एकाग्रता और प्रतिभा से केवल 64 दिनों में 14 विद्याओं तथा 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया था। यह भी माना जाता है कि उन्होंने चार दिनों में चारों वेद, छह दिनों में छह शास्त्र, 16 दिनों में 16 कलाएं और 18 दिनों में 18 पुराणों का अध्ययन पूरा किया।
इसके अतिरिक्त भगवान श्रीकृष्ण ने उपनिषद, छंद, अलंकार और अन्य शास्त्रों का भी अध्ययन किया था। सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण की बैठी हुई प्रतिमा विराजित है, जिसके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
गुरु पूर्णिमा के दिन होने वाला विद्यारंभ संस्कार उन परिवारों के लिए विशेष माना जाता है, जो अपने बच्चों की शिक्षा की शुरुआत धार्मिक विधि और गुरु के आशीर्वाद के साथ करना चाहते हैं।



